प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव मां जानकी के दरबार में टेकेंगे माथा.
अशोकनगर : जिले के मुंगावली तहसील में शुरू हुए करीला मेला में आज बुधवार को सीएम मोहन यादव शिरकत करेंगे. भाईदोज से लंकर रंगपंचमी तक चलने वाले इस त्योहार में हर साल 20 लाख से ज्यादा लोग पहुंचते हैं. इस मेले में मध्यप्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों के श्रद्धालु भारी संख्या में पहुंचते हैं. इस बार करीला मेला 30 एकड़ में फैला हुआ, जिससे इसकी भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
नृत्य से मां जानकी की आराधना
प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव बुधवार को सुबह 10 बजे मां जानकी के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद लेंगे. बता दें कि करीला मेला के दौरान करीब 2 हजार से ज्यादा डांसर 3 दिन तक मां जानकी की नृत्य कर आराधना करती हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां नृत्य करने से मन्नत पूरी होती है. वहीं कई परिवार मन्नत पूरी होने के बाद भी यहां राई नृत्य करवाते हैं.
यहां का राई नृत्य सबसे लोकप्रिय
गौरतलब है कि करीला मेला होली के बाद भाई दूज से शुरू होता है, जो रंग पंचमी तक पूरे शबाब पर होता है. यहां का राई नृत्य सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. जब किसी श्रद्धालु की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वह अपने परिवार के साथ मां जानकी के दरबार में पहुंचकर राई नृत्य कराते हैं. बताया जाता है की करीला मेला प्रदेश के सबसे बड़े मेलों में से एक है. इस करीला मेले में कई सेलिब्रिटी और राजनेता भी शामिल होते हैं.
क्या है करीला मेले का इतिहास?
मान्यता है कि लव-कुश के जन्म के बाद माता जानकी के अनुरोध पर महर्षि वाल्मिकी ने उनका जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया. इस अवसर पर स्वर्ग से अप्सराएं आईं और उन्होंने यहां नृत्य किया था. तभी से यहां नृत्य करने की परंपरा बन गई, जो आज भी जारी है. गौरतलब है कि रंगपंचमी के अवसर पर यहां लव-कुश जन्मोत्सव मनाया जाता है. इसी दौरान हजारों नृत्यांगनाएं राई नृत्य प्रस्तुत करती हैं.

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