आशा दीदियों ने अपनी सेवाओं से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों का जीता है विश्वास: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
भोपाल : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रत्येक कर्मचारी पूरी सजगता और समर्पण के साथ जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भूमिका सराहनीय है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवाओं से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों का विश्वास जीता है, जिससे वे जोखिमपूर्ण स्थितियों में भी आश्वस्त होकर स्वास्थ्य संस्थानों में पहुँच रही हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दीक्षा नगर, बागमुगलिया निवासी गर्भवती महिला के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और हितग्राहियों के बीच मजबूत विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने आशा दीदी श्रीमती सुमन वर्मा के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की है।
आशा कार्यकर्ता सामुदायिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आशा कार्यकर्ता सामुदायिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं, जिनके प्रयासों से हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और उचित देखभाल संभव हो पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में “सबका स्वास्थ्य, सबका विश्वास” को साकार किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के बीच विश्वास का एक मजबूत ताना-बाना बुना है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो रहा है।
गर्भवती महिलाओं से नियमित जाँच कराने की अपील की
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाना ही स्वास्थ्य विभाग के प्रत्येक कर्मचारी का संकल्प है। उन्होंने सभी आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों से श्रीमती सुमन वर्मा की तरह समर्पण और जागरूकता के साथ सेवाएँ प्रदान करने का आहवान किया, जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुँच को और बेहतर किया जा सके। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से नियमित जाँच कराने की अपील की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया गर्भवती महिला को 25 मार्च को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गुलाबी नगर में आयोजित विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शिविर में जांच के लिए चिन्हित किया गया था। महिला का वजन कम था और उसे पूर्व में गर्भपात हो चुका था, इसलिए उसे हाईरिस्क श्रेणी में रखा गया। वार्ड क्रमांक 55 की आशा कार्यकर्ता श्रीमती सुमन वर्मा ने महिला को शिविर में लाकर जांच करवाने के लिए लगातार प्रेरित किया। लेकिन महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ जाने के लिए तैयार नहीं थी। यह आशा कार्यकर्ता द्वारा समय-समय पर दी गई देखभाल और सलाह का ही परिणाम था कि महिला को विश्वास हो गया कि आशा दीदी के साथ जाने पर ही उसे और उसके बच्चे को किसी प्रकार का खतरा नहीं होगा। महिला के इस विश्वास को देखते हुए आशा कार्यकर्ता ने अपने ही वाहन से महिला को शिविर में लाकर उसकी जांच करवाई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि 25 मार्च को आयोजित एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शिविरों में 66 स्वास्थ्य संस्थाओं में आठ सौ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें हाईरिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं को चिन्हित कर उनकी तीन अतिरिक्त प्रसव पूर्व जांच करवाई जा रही है। मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए हर माह की 9 और 25 तारीख को यह विशेष शिविर आयोजित किए जाते हैं। प्रसव के बाद भी 45 दिन तक आशा कार्यकर्ता द्वारा गृह भेंट कर फॉलोअप किया जाता है, जिससे प्रसव के बाद महिला और शिशु को बेहतर देखभाल मिल सके।

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