पिंडदान नहीं कर पाए? इन 4 जगहों पर दीपक जला दीजिए, पितर हो जाएंगे प्रसन्न
हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का दिन न केवल पितरों को समर्पित होता है, बल्कि इसे आत्मिक शांति और दिव्य ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस दिन तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश यह कर्म न कर पाए, तो कुछ विशेष दीपक उपायों के माध्यम से भी पितरों का आशीर्वाद पाया जा सकता है.
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि चैत्र अमावस्या 2025 में 29 मार्च को मनाई जाएगी. यह तिथि 28 मार्च की रात से शुरू होकर 29 मार्च की शाम तक रहेगी, परंतु उदयातिथि के अनुसार 29 मार्च को पूजा, दान और दीपदान करना शुभ होगा.
आचार्य भारद्वाज के अनुसार, यदि तर्पण या पिंडदान न हो सके तो चार स्थानों पर दीपक जलाने मात्र से ही पितरों और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है.
पहला दीपक – घर के मुख्य द्वार पर.
माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. साथ में एक लोटा जल रखें और दरवाजा खुला रखें. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और लक्ष्मी जी का आगमन होता है.
दूसरा दीपक – दक्षिण दिशा में, घर के बाहर.
यह दीपक सरसों के तेल का होना चाहिए. पौराणिक मान्यता है कि अमावस्या की शाम पितर धरती से अपने लोक की ओर लौटते हैं. उन्हें मार्ग में प्रकाश मिले तो वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.
तीसरा दीपक – पितरों की तस्वीर या स्मृति स्थान पर.
घर में जहां आपने पितरों की तस्वीर लगाई हो, वहां दीपक जलाएं. यह श्रद्धा का प्रतीक है और आत्मिक संबंध को मजबूत करता है.
चौथा दीपक – पीपल के वृक्ष के नीचे.
इस दिन पीपल की पूजा विशेष फलदायी होती है. पीपल के नीचे देवताओं के लिए तिल के तेल और पितरों के लिए सरसों के तेल का दीप जलाएं.
इन सरल लेकिन श्रद्धा से भरे उपायों से पितृदोष शांत होता है, और जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का संचार होता है. दीप से न सिर्फ अंधकार दूर होता है, बल्कि आत्मा भी आलोकित होती है.

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