बालोद जिले के तानसिंह बरवा की अनोखी क्षमता, 28 साल से बिना आधुनिक उपकरण के खोजते हैं जल स्रोत
आस्था और विज्ञान अक्सर एक-दूसरे के समक्ष सवाल खड़े करते हैं. भारत की प्राचीन परंपराएं कई बार विज्ञान के लिए चुनौती बन जाती हैं. ऐसा ही एक रोचक मामला छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में सामने आया है, जहां एक ग्रामीण पिछले 28 वर्षों से बिना किसी आधुनिक उपकरण के केवल दो तारों की मदद से जमीन के नीचे जल स्रोतों की जांच कर रहा है. बालोद जिले के पेरपार गांव में रहने वाले तानसिंह बरवा (पुत्र बनिहार) का दावा है कि 22 वर्ष की उम्र में गंगा मइया ने सपने में उन्हें जल स्रोतों का पता लगाने का आशीर्वाद दिया था. उन्होंने बताया कि एक हफ्ते तक लगातार उन्हें अजीब अनुभव हुए, जिसके बाद मां गंगा मइया ने उन्हें यह विशेष शक्ति प्रदान की.
इसके बाद से ही वे जल स्रोतों की पहचान करने में जुट गए. अब तक वह 10,000 से अधिक जगहों पर जल स्रोत की जांच कर चुके हैं, जिनमें से 80% से अधिक मामलों में उनका दावा सही साबित हुआ है. उनकी इस अनोखी क्षमता की खबर फैलने के बाद अब लोग उन्हें दूर-दूर से बुलाकर अपने क्षेत्र में जल स्रोतों की जांच कराते हैं.
हर साल हजारों जल स्रोतों की करते हैं जांच
तानसिंह बरवा का कहना है कि वे सिर्फ जल की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि पानी की गहराई और प्रवाह की दिशा भी बता सकते हैं. उनका मानना है कि यह सब माँ गंगा मइया की कृपा से संभव हो रहा है. वह हर साल चैत्र और क्वार नवरात्रि में झलमला स्थित गंगा मइया मंदिर में तेल ज्योत कलश की स्थापना भी करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार 26 जनवरी 1998 को पानी की जांच की थी, और तब से यह सिलसिला जारी है.
नवंबर से जुलाई तक का समय उनके लिए मुख्य सीजन होता है, जब वे 2,000 से 2,500 जगहों पर पानी की जांच करते हैं. बालोद जिले के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा और बागेश्वरधाम तक वे जल स्रोतों की जांच करने जा चुके हैं.
शुल्क के रूप में लेते हैं केवल इतनी राशि
तानसिंह अपने इस कार्य के लिए किसी प्रकार का भारी-भरकम शुल्क नहीं लेते. वे केवल मंदिर में जलने वाली ज्योत कलश की राशि के बराबर शुल्क लेते हैं. पहले यह राशि ₹301 थी, जो बढ़कर अब ₹701 हो गई है. इसके अलावा वे कोई अतिरिक्त धनराशि नहीं लेते.
100 मीटर की गहराई तक पानी मिलने का दावा
नगर व्यवसायी राकेश चौरड़िया ने भी तानसिंह की क्षमता पर भरोसा जताते हुए अपनी जमीन पर जल स्रोत की जांच करवाई. उन्होंने बताया कि 100 मीटर की गहराई पर अच्छा जल स्रोत मिलने का दावा किया गया, जो सत्य भी साबित हुआ. हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस पद्धति को परखा नहीं गया है, लेकिन तानसिंह की लगातार मिल रही सफलता इस अनोखे दावे को और मजबूत बनाती है.
इस पूरे मामले में वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि यह मामला सीधे आस्था और विज्ञान से जुड़ा है. हालांकि, “चमत्कार को नमस्कार” वाली कहावत तानसिंह बरवा के मामले में कहीं न कहीं सटीक बैठती है.

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