नवरात्रि में कन्याओं को न दें ये उपहार, हो जाएगा पाप !
नवरात्रि व्रत के बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्य है कन्या पूजन अपनी स्थानीय और घरेलू मान्यताओं के आधार पर अष्टमी अथवा नवमी के दिन लोग कन्याओं को घर बुलाकर उन्हें भोजन कराते हैं. सबसे पहले घर बुलाकर उनके पद धोए जाते हैं और भोजन के पश्चात उन्हें माता की चुनरी उड़ा कर उपहार और दक्षिणा आदि देखकर पैर छूकर उन्हें विदा किया जाता है. नवरात्रि के अंतिम व्रत के पक्ष अष्टमी अथवा नवमी की तिथि में छोटी-छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन करना कन्या पूजन या कंजक कहलाता है.
कन्या पूजन में लोग 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप मानकर सम्मान सहित घर बुलाकर उन्हें भोजन पूरी हलवा चना और नारियल खिलाते हैं तथा साथ ही उन्हें उपहार देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं. मान्यता है कि कन्या पूजन करने से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करती है.
कन्या पूजन में ना करें गलती : लोग काफी उत्साह से नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं लेकिन उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि कोई ऐसी गलती ना कर दें जिससे माता नाराज हो जाए और आपको माता की नाराजगी का शिकार बनना पड़े.
कन्याओं को ये उपहार ना दें : कन्या पूजन में छोटी-छोटी कन्याओं को प्लास्टिक की चीज अथवा स्टील के बने बर्तन आदि उपहार में नहीं देना चाहिए. कांच से बनी हुई चीज अथवा नुकीली चीज जैसे चाकू कैंची या कोई भी धारदार तलवार आदि चीज कंजक को नहीं देनी चाहिए. कन्या पूजन के पश्चात कन्याओं को काले वस्त्र, काले रंग का रुमाल आदि बिल्कुल भी ना दें.
कैसे करें कन्या पूजन : कन्याओं के घर आते ही सबसे पहले उनके पैर धोए, उसके पश्चात उन्हें तिलक लगाए और आसन पर बिठा दें. कन्या के भजन में लहसुन प्याज से कोई भी चीज ना बनाएं. कन्याओं को विदा करने के बाद तुरंत घर की साफ सफाई नहीं करनी चाहिए.
कन्याओं को क्या दें : नवरात्रि में कन्या पूजन के पश्चात कन्याओं को भोजन के साथ-साथ श्रृंगार का सामान, शिक्षा से जुड़ी चीज जैसे कॉपी, किताब, पेन, पेंसिल, ज्योमेट्री बॉक्स, फल, मिठाई, पैसे और टेडीवियर आदि दिए जा सकते हैं.

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