कानपुर में स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताब खरीदने का दबाव, प्रशासन ने गठित की कमेटी
आजकल हर स्कूल में नया सत्र शुरू हो रहा है और नई क्लास में जाने वाले स्टूडेंट्स को कॉपी-किताब खरीदनी पड़ रही है. ऐसे में कुछ स्कूलों ने अवैध कमाई का नया जरिया निकाल लिया है और स्टूडेंट्स के अभिभावकों पर दबाव बनाकर स्कूल कैंपस से या किसी एक ही दुकान से कॉपी किताब खरीदने को बोला जाता है. इस मामले में प्रशासन ने एक कमेटी का गठन किया गया, जिसके बाद छठी क्लास की एक छात्रा ने डीएम के पास जाकर गुहार लगाई. डीएम ने मामले में तुरंत कार्यवाही के आदेश दिए तो स्कूल ने लिखित में जवाब देते हुए अपना आदेश वापस ले लिया.
कानपुर के रहने वाले अमित कुमार निरंजन की बेटी कानपुर के सेंट मैरी कॉन्वेंट हाई स्कूल में क्लास छठी की छात्रा है. छात्रा ने अपने पिता के साथ डीएम के पास जाकर एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने डीएम को बताया कि क्लास छठी के छात्रों पर फैशन डिजाइनिंग नामक एक अनावश्यक और गैर-अनिवार्य विषय को जबरन थोपा जा रहा है. अमित निरंजन ने अपनी शिकायत में कहा कि उक्त विषय, जो आईसीएसई बोर्ड की ओर से निर्धारित अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है.
14 पेज की किताब
वह छात्रों पर जबरन थोपा दिया गया है और फैशन डिजाइनिंग नामक पुस्तक को अनिवार्य कर दिया गया है. इस पुस्तक में केवल 14 पेज हैं और इसे 210 रुपये की अत्यधिक कीमत पर बेचा जा रहा है. इसकी अत्यंत खराब गुणवत्ता और तथ्यात्मक तथा शैक्षणिक त्रुटियों से भरे होने के बावजूद, स्कूल ने इसे सभी छात्रों के लिए खरीदना अनिवार्य कर दिया है. अमित निरंजन का आरोप था कि यह पुस्तक उसी स्कूल के एक शिक्षक ने स्कूल प्रिंसिपल के निर्देशन और प्रेरणा से लिखी है.
एक ही डिस्ट्रीब्यूटर पर मिल रही किताब
इसे केवल एक डिस्ट्रीब्यूटर ही बेचा रहा है, जो स्कूल द्वारा अधिकृत है और सभी पुस्तकों की बिक्री पर एकाधिकार रखता है. यह माता-पिता का शोषण करने के लिए जानबूझकर किए गए प्रयास की ओर इशारा करता है. इस विशेष पुस्तक की कीमत में अनुमानित दो हजार प्रतिशत का मार्कअप दर्शाया गया है, जिसमें कमीशन और लाभ कथित तौर पर स्कूल और डिस्ट्रीब्यूटर के बीच शेयर किए जाते हैं. आरोप है कि इस मामले की शिकायत कई बार स्कूल प्रबंधन से की गई, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
डीएम से की स्कूल से शिकायत
इसके बाद परेशान होकर अमित निरंजन अपनी बेटी के साथ डीएम के सामने पहुंचे. डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने तुरंत शिकायती पत्र के साथ स्टाफ को स्कूल भेजा जिसके बाद स्कूल प्रबंधन के हाथ पैर फूल गए. तुरंत ही स्कूल ने एक पत्र जारी करके कहा कि प्रिंसिपल हमेशा अभिभावकों से मिलने के लिए उपलब्ध रहते हैं और उनकी शिकायतें सुनने के लिए तैयार रहते हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी शिकायत दर्ज की गई है.
स्कूल ने फैसला लिया वापस
हम आपको आश्वस्त करते हैं कि भविष्य में ऐसी चीजें नहीं होंगी. इसके साथ ही स्कूल ने कहा कि उनके लिए यह विषय चुनना अनिवार्य नहीं है और वे कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं. छात्रों को किसी भी दुकान से किताबें खरीदने की अनुमति है. मामले में राहत मिलने के बाद छात्रा ने अपने पिता के साथ दोबारा डीएम से मुलाकात की और इस दौरान दोनों ने डीएम को धन्यवाद किया.

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