बस्तर की महिलाएं बदल रही हैं आजीविका की तस्वीर
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य की महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक विकास के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। आजीविका मिशन से जुड़कर महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर अग्रसर हो रही हैं।
गंगा महिला स्व-सहायता समूह ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण महिलाएं यदि अवसर और संसाधन प्राप्त करें तो वे न केवल स्वयं की जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए परिवर्तन की वाहक बन सकती हैं। यह समूह आज बस्तर की मिट्टी से उपजी नारी शक्ति की पहचान बन चुका है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड के ग्राम कोंडालुर में कार्यरत गंगा महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं फाइल और पैड निर्माण के माध्यम से न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही हैं। समूह की पांच महिलाएं फाइल पैड निर्माण के कार्य से जुड़कर घर के कामकाज के साथ-साथ एक व्यवस्थित और लाभकारी आजीविका को अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ा रही हैं। इस कार्य से उन्हें नियमित आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक सुधार आया है।
समूह को फाइल पैड निर्माण के लिए जरूरी मशीनें एवं अन्य संसाधन पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे, जिससे महिलाओं को कार्य करने में तकनीकी सुविधा और सरलता प्राप्त हुई। मशीनों की सहायता से उत्पादन की गति तेज हुई और गुणवत्ता में भी सुधार आया। अब तक समूह द्वारा 5000 से अधिक फाइलें और पैड तैयार किए जा चुके हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत 1 लाख 90 हजार रुपये है। इनमें से 4500 फाइलें 1 लाख 71 हजार रुपये में सफलतापूर्वक विभिन्न शासकीय विभागों एवं निजी संस्थानों को बेची जा चुकी हैं। समूह द्वारा तैयार फाइलों की बिक्री दर प्रति फाइल 20 रुपये तथा प्रति पैड 18 रुपये निर्धारित है, जो बाजार के अनुसार उचित और प्रतिस्पर्धात्मक मानी जा रही है।
समूह की फाइलें और पैड मुख्यतः शासकीय कार्यालयों, स्थानीय विद्यालयों एवं अन्य संस्थानों को आपूर्ति की जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन और बिहान मिशन द्वारा समूह को निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और विपणन में सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है और बाजार की पहुंच भी बढ़ रही है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पाद स्वयं तैयार कर, बाजार में बेच रही हैं और अपने परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। यह न केवल उनके आत्मसम्मान को बढ़ाता है, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी बनता है।
समूह द्वारा भविष्य में उत्पादन क्षमता को बढ़ाने, नवीन उत्पादों को जोड़ने और ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बिक्री का विस्तार करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके लिए बिहान के माध्यम से उन्हें आवश्यक तकनीकि प्रशिक्षण और सहायता दी जाएगी।

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