यमुना में पानी कम हुआ, पर राजधानी में खतरे का अलर्ट जारी, बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने किया अपडेट
नई दिल्ली: दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बुधवार सुबह दिल्ली के पुराने लोहे के पुल पर जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर के करीब दर्ज किया गया। इसके साथ ही हथिनीकुंड बैराज से काफी कम पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे कुछ और राहत मिलने की उम्मीद है। राजधानी में यमुना का जलस्तर जरूर घट रहा है लेकिन लोगों की मुसीबतें अभी कम नहीं हुई है। इस आपदा के बाद उनके सामने नए सिरे से जीवन शुरू करने की चुनौती है। हालांकि कई इलाकों से लोग अपने घरों से कीचड़ और गाद निकालने लगे हैं। इसके साथ ही उनके सामने अनेक प्रकार के रोगों का खतरा भी मंडरा रहा है। कुछ लोगों को घर छोड़ते समय कागज निकालने का समय मिला, अब उनके सामने नए सिरे से कागज बनवाने की चुनौती होगी।
सरकार ने की मुआवजा की घोषणा
वहीं मंगलवार को दिल्ली सीएम ने बाढ़ के कारण फसलों के नष्ट होने से परेशान किसानों के लिए मुआवजा की घोषणा की। रेखा गुप्ता ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, सरकार बाढ़ से प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करेगी। हम उन किसानों को भी मुआवजा देंगे जिनकी फसलें जलमग्न हो गयीं। दिल्ली को फिर से पटरी पर लाने के लिए सरकार लोगों की मदद करेगी। यमुना का जलस्तर पिछले गुरुवार को 207.48 मीटर तक पहुंच गया था, जो इस मौसम का सबसे उच्चतम स्तर था। इसके बाद से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले मंगलवार को नदी खतरे के निशान को पार कर गई थी, जिसके कारण पुराने रेलवे पुल पर आवाजाही बंद कर दी गई थी।
204.50 मीटर है चेतावनी का निशान
राष्ट्रीय राजधानी के लिए चेतावनी का निशान 204.50 मीटर और खतरे का निशान 205.33 मीटर है, जबकि जलस्तर 206 मीटर तक पहुंचने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर से नीचे जाने के बाद, दिल्ली यातायात पुलिस ने सोमवार रात पुल को यातायात के लिए खोल दिया। पुराना रेलवे पुल नदी के प्रवाह और संभावित बाढ़ के खतरों पर नजर रखने के लिए एक प्रमुख अवलोकन बिंदु के रूप में काम करता है। पिछले कुछ दिनों में यमुना के किनारे के कई इलाके जलमग्न हो गए थे। निचले इलाकों से निकाले गए लोगों के लिए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मयूर विहार क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर लगाए गए हैं। मॉनेस्ट्री बाजार, मदनपुर खादर और यमुना बाजार जैसे इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए, जिससे लोगों को शिविरों में शरण लेनी पड़ी। दिल्ली को 2023 में अभूतपूर्व बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। उस दौरान कई इलाके जलमग्न हो गए थे और 25,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।

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