अजब-गजब घटना: झांसी के बुज़ुर्ग को सांप के डंसने का 40 साल पुराना सिलसिला, 13वीं बार काटने के बाद भी परंपरा निभाने मंदिर दौड़ता है परिवार
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक चौंकाने वाला और रहस्यमयी मामला सामने आया है। जिले के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को पिछले करीब 40 सालों से हर तीन साल पर सांप काटता आ रहा है। यह सिलसिला अब तक 13 बार हो चुका है। हैरानी की बात है कि हर बार उनकी जान बच जाती है। इसको लेकर इलाके में चर्चा का बाजार गरमाया हुआ है। इतने सालों में सांप 13 बार उन पर हमला कर चुका है, लेकिन अब तक उसने परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। यह भी लोगों को हैरान करता है। पिछले दिनों सांप ने 13वीं बार बुजुर्ग किसान को डसा है। एक बार फिर उनकी जान बचा ली गई है।
हनुमान मंदिर में झाड़-फूंक
सीताराम अहिरवार नामक यह बुजुर्ग झांसी मुख्यालय से लगभग 45 किलोमीटर दूर चिरगांव थाना क्षेत्र के पट्टी कुमर्रा गांव के रहने वाले हैं। सांप के काटने के बाद इन्हें कभी अस्पताल नहीं ले जाया गया। परिवार और ग्रामीण हर बार इन्हें गांव के हनुमान मंदिर ले जाते हैं। वहां झाड़-फूंक की जाती है। दावा है कि इसके बाद सीताराम धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं।
पहली बार खेत में हमला
गांव के ओझा कमलेश के मुताबिक, करीब 39 साल पहले जब सीताराम की उम्र 40-42 वर्ष थी। उस दौरान वे खेत में हल चला रहे थे। इसी समय पहली बार काले सांप ने उन्हें काटा। उस समय भी मंदिर में झाड़-फूंक कर उन्हें बचाया गया। इसके बाद हर तीन साल पर अगस्त-सितंबर (भादो माह) में सांप उन्हें डसता है।
सपने में आता है सांप
सीताराम का कहना है कि सांप उन्हें काटने से दो दिन पहले सपने में दिखाई देता है। वे कहते हैं कि ऐसा लगता है, जैसे सांप किसी प्रकार का संकेत दे रहा हो। वे दावा करते हैं कि सांप इन संकेतों के जरिए उन्हें पहले से बता देता है कि वह डसने वाला है। कई बार सावधानी बरतने और बचने की कोशिश के बाद भी सांप हर बार डस ही लेता है। गांव वालों का कहना है कि यह सांप अब तक सिर्फ सीताराम को ही निशाना बनाता है। परिवार के अन्य किसी सदस्य को उसने कभी नहीं डसा। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।
पिछले दिनों फिर हुई घटना
गांव वालों का दावा है कि इस बार भी 4-5 दिन पहले भादो माह में सांप ने सीताराम को डसा। परिवार तुरंत उन्हें हनुमान मंदिर ले गया। वहां झाड़-फूंक के बाद उनकी हालत संभल गई। ग्रामीण इस पूरी घटना को दैवीय चमत्कार के रूप में पेश करते हैं। हालांकि, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि जांच के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहा जा सकता है।

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