अंबी बिष्ट का एलडीए में कार-नामे — संपत्ति अधिकारी के रूप में भूखंड बैनामा व फर्जी दस्तावेजों का आरोप
लखनऊ: उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष और बीजेपी नेता अपर्णा यादव का मां अंबी बिष्ट की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विजिलेंस ने अंबी बिष्ट समेत अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इन सभी पर जानकीपुरम की प्रियदर्शिनी भूखंड योजना में अनियमितता का आरोप है। अंबी बिष्ट तब एलडीए की संपत्ति अधिकारी थीं। बता दें अंबी बिष्ट सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की समधन हैं। अंबी बिष्ट यूपी के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवार से संबंध रखती है। मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अंबी बिष्ट की बेटी अपर्णा बिष्ट से शादी हुई है। प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के बेटे है। अंबी बिष्ट लंबे समय तक लखनऊ नगर निगम में तैनात रही है। उनके पति अरविंद सिंह बिष्ट पेशे से पत्रकार और सूचना आयुक्त रह चुके हैं। लखनऊ नगर निगम में तैनाती के दौरान अंबी बिष्ट लगातार चर्चाओं में बनी रही थी।
नगर आयुक्त से भिड़ गई थीं
ताकतवर परिवार से ताल्लुख रखने वाली अंबी बिष्ट लखनऊ में करीब 25 साल तक तैनात रही हैं। उन्होंने लखनऊ नगर निगम में जोनल अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी सेवाएं दी हैं। इस दौरान उनका कई बार तबादला भी हुआ, लेकिन रसूख के चलते हर बार तबादला रद्द हो गया। एक बार वो बैठक के दौरान नगर आयुक्त से ही भिड़ गई थीं। तत्कालीन नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने अंबी बिष्ट को सस्पेंड करने के लिए शासन को पत्र लिख दिया था। उसके बाद उन्हें उस पद से हटा दिया गया था। अंबी बिष्ट लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में भी तैनात रह चुकी हैं। बाद में उन्हें लखनऊ नगर निगम में शिफ्ट कर दिया गया था।
सपा के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं अपर्णा यादव
अंबी बिष्ट की बेटी अपर्णा यादव मौजूदा समय में यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं। अपर्णा सपा के टिकट पर लखनऊ कैंट सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं। लेकिन उस चुनाव में रीता बहुगुणा जोशी ने जीत दर्ज कर ली थी। बाद में परिवार में नाराजगी बढ़ने के बाद अपर्णा यादव ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। बीजेपी ने अपर्णा यादव को अपने पाले में लाकर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को चौतरफा घेरने का काम किया था। यही वजह रही कि उस चुनाव में बीजेपी रिकॉर्ड सीटों से जीत दर्ज की थी। बीजेपी में कई साल बिना पद के काम करने वाली अपर्णा यादव को पिछले साल महिला आयोग में जिम्मेदारी दे दी गई थी।

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