कानून पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: दोबारा विवाह करने वालों को नहीं मिलेगी तलाक को चुनौती देने की छूट
भोपाल: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने पारिवारिक न्यायालय के तलाक के फैसले को चुनौती दी थी। यह तलाक उसके पूर्व पति द्वारा दूसरी शादी करने के बाद दायर किया गया था। अदालत ने कहा कि अब इस याचिका का कोई मतलब नहीं है। हालांकि, अदालत ने महिला को अपने पति से गुजारा भत्ता मांगने के लिए निचली अदालत में अलग से मुकदमा दायर करने की अनुमति दी है।
130 दिनों की देरी से दायर की अपील
अदालत ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में 130 दिनों की देरी हुई है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 के तहत अपील दायर करने की अवधि के दौरान किसी भी पक्ष द्वारा शादी करने पर रोक है। लेकिन एक बार वह अवधि समाप्त हो जाने के बाद, दोबारा शादी करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। उच्च न्यायालय (HC) ने कहा कि अगर अपील पर सुनवाई होती है, तो इससे उस महिला के वैवाहिक अधिकारों को खतरा होगा, जिसने अपने तलाकशुदा पति से शादी कर ली है।
सुनवाई का कोई मतलब नहीं
अदालत ने यह भी कहा कि अपील दायर करने में बहुत देर हो चुकी है। इसलिए अब इस मामले पर सुनवाई करने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन महिला चाहे तो अपने पूर्व पति से गुजारा भत्ता पाने के लिए अलग से केस कर सकती है।
गुजारा भत्ता क्या होता है
तलाक या कानूनी रूप से अलग होने के बाद, एक साथी को दूसरे को आर्थिक मदद देनी होती है। इसे गुजारा भत्ता कहते हैं। इसका मकसद यह है कि कमजोर साथी भी सम्मान से जी सके। यह मदद कोर्ट तय करती है। कोर्ट पति-पत्नी की कमाई, जरूरतें और बच्चों की जिम्मेदारी देखती है। कुछ मामलों में, जैसे पत्नी का व्यभिचार या आत्मनिर्भर होना, गुजारा भत्ता नहीं मिलता। गुजारा भत्ता कई तरह का होता है। अस्थायी गुजारा भत्ता तलाक की प्रक्रिया के दौरान दिया जाता है। स्थायी गुजारा भत्ता तलाक के बाद दिया जाता है।

राशिफल 23 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
वनाधिकार पट्टा और पीएम आवास से मुरिया परिवार को मिला नया जीवन
वर्मी कंपोस्ट उत्पादन बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
राज्यपाल पटेल से भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन
चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर
कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल
द्वारका नगरी योजना से शहरी विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से बदली तस्वीर