कांग्रेस में ढाई साल का फॉर्मूला? सिद्धारमैया से कुर्सी छीन सकते हैं DK शिवकुमार!
बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में इन दिनों एक सवाल हर जुबान पर है कि अगला सीएम कौन? मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा हो रहा है. इसके ठीक बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को कमान सौंपने की खबरें जोरों पर हैं. स्थानीय मीडिया में दावा है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार विधानसौध में सीएम पद की शपथ ले सकते हैं. लेकिन जब ये सवाल सिद्धारमैया से पूछा गया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा. आइए क्या है पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.
ढाई साल का फॉर्मूला–सच या अफवाह?
2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक जीता था. उस वक्त पार्टी के अंदर दो बड़े चेहरे थे, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार. दोनों के बीच कथित तौर पर एक समझौता हुआ था कि पहले ढाई साल सिद्धारमैया, अगले ढाई साल शिवकुमार. अब जब 20 नवंबर को सिद्धारमैया का आधा कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो ये फॉर्मूला फिर से चर्चा में है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये लिखित समझौता था या सिर्फ राजनीतिक गलियारे की बातें?
सिद्धारमैया ने क्या कहा?
शुक्रवार को विधानसौध में पत्रकारों ने सिद्धारमैया से पूछा, “सर, खबर है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार सीएम बन जाएंगे?” बस इतना सुनते ही सिद्धारमैया भड़क गए. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “ये किसने बताया? क्या शिवकुमार ने तुम्हें फोन करके कहा? ये सब बकवास है.” फिर बिना कुछ और बोले, वो चले गए. ये पहली बार नहीं जब सिद्धारमैया ने ऐसी खबरों पर नाराजगी जताई हो. लेकिन इस बार उनकी बौखलाहट ने सबको हैरान कर दिया.
शिवकुमार चुप, लेकिन दावा मजबूत
दूसरी तरफ डीके शिवकुमार खामोश हैं. न उन्होंने सिद्धारमैया पर कोई तंज कसा, न ही कोई बयान दिया. लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि डीके ने हाईकमान से साफ कह दिया है कि 20 नवंबर के बाद कुर्सी उनकी है.” शिवकुमार वोक्कलिगा समुदाय के बड़े नेता हैं. उनके पास पार्टी संगठन की कमान है. 2023 में उन्होंने सिद्धारमैया को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. अब वो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. सिद्धारमैया खेमे के नेता खुलकर सामने आ गए हैं. आवास मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान ने कहा कि सिद्धारमैया 2028 तक सीएम रहेंगे. शिवकुमार को इंतजार करना चाहिए. वो बीजेपी में नहीं जाएंगे, उनका खून कांग्रेस का है. समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा, “हमें दलित सीएम चाहिए. आंदोलन जारी रहेगा. लेकिन फैसला हाईकमान करेगा.” यानी एक तरफ शिवकुमार की दावेदारी, दूसरी तरफ दलित चेहरों की मांग और बीच में सिद्धारमैया की कुर्सी.
हाईकमान की चुप्पी
सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है. कांग्रेस आलाकमान अभी तक चुप हैं. पिछले हफ्ते खड़गे बेंगलुरु आए थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ. सूत्र बताते हैं कि हाईकमान 10 नवंबर तक स्थिति साफ कर सकता है. अगर शिवकुमार सीएम बने, तो सिद्धारमैया को क्या मिलेगा? क्या दलित नेताओं की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी और सबसे बड़ा सवाल कि क्या ये ढाई साल का फॉर्मूला सच में था?

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