रूसी वैज्ञानिकों का दावा—किर्गिस्तान की झील में मिला डूबा हुआ शहर, एटलांटिस की बहस फिर तेज
नई दिल्ली। सदियों पहले भूकंप के झटकों ने इस कदर धरती को हिलाया कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा पानी में समा गया। यह कोई साधारण शहर नहीं था, बल्कि इसे पूरी दुनिया का केंद्र कहा जाता था। यूनान के मशहूर दार्शनिक प्लेटो ने इस कहानी को सच बताते हुए इस शहर को 'एटलांटिस' का नाम दिया था। प्लेटो का कहना था कि एटलांटिस एक टापू पर स्थित दुनिया का सबसे सभ्य और खूबसूरत शहर था।
प्लेटो के द्वारा बताए गए एटलांटिस की वैज्ञानिक आज भी तलाश कर रहे हैं। इसी कड़ी रूसी पुरातत्वविदों ने किर्गिस्तान की एक झील में पूरे शहर को ढूंढने का दावा किया है। यह खबर सामने आने के बाद एटलांटिस का नाम एक बार फिर सभी की जुबां पर है। यह शहर एटलांटिस की तरह ही खूबसूरत और समृद्ध नजर आ रहा है।
भूकंप के बाद झील में समाया
रूसी विज्ञान अकादमी के पुरातत्वविदों का कहना है कि उन्होंने किर्गिस्तान की इस्सिक कुल झील में एक जलमग्न शहर को ढूंढा है। यह शहर 15वीं शताब्दी में आए भूकंप के बाद झील में समा गया था। यह दुनिया की आठवीं सबसे गहरी झील है। इस झील का सर्वेक्षण किया जा रहा है। झील के आसपास खुदाई जारी है।
रूसी वैज्ञानिकों ने झील के नीचे जो शहर खोजा है, वो अपने समय में बेहद समृद्ध हुआ करता था। इस शहर में बड़े व्यावसायिक समूह की तस्वीर देखी जा सकती है। इस शहर की इमारतें पक्की ईंट, पत्थर और लकड़ी की बीम से मिलकर बनी थीं। साथ ही यहां अनाज और आटा पीसने वाली चक्की भी मिली है।
रहस्यमयी शहर में मिला बड़ा कब्रिस्तान
रूसी पुरातत्वविदों के अनुसार, यह शहर काफी बड़ा है, जहां एक सार्वजनिक इमारत भी मिली है। यह इमारत मस्जिद, स्नानघर, मदरसा या स्कूल के रूप में इस्तेमाल होती रही होगी। इसके अलावा शहर में एक बड़ा कब्रिस्तान भी मिला है। इन कब्रों में दफन लोगों को पारंपरिक इस्लामी रीति-रिवाजों से दफनाया गया है। शव का सिर उत्तर की ओर और मुंह किबला की तरफ है। यह वही दिशा है, जिस दिशा में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं।
डूबने से पहले लोगों ने छोड़ दिया था शहर
रूसी पुरातत्वविदों का कहना है कि इस खोज से यह साबित हो गया है कि यहां कभी कोई एक प्राचीन शहर था, जो भूकंप के कारण झील में धंस गया। हालांकि, आपदा आने से पहले ज्यादातर लोगों ने इस शहर को छोड़ दिया था। वहीं, कुछ समय बाद बंजारे यहां आकर बस गए और झील के किनारे छोटे-छोटे गांव बना लिए।
यूनानी दार्शनिक प्लेटो के एटलांटिस को कई लोग महज एक कल्पना मानते हैं, तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह सच भी हो सकता है। मुमकिन है कि कभी कोई ऐसा समृद्ध शहर रहा हो, जो अब धरती पर मौजूद नहीं है।

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