असम में प्रिंयका गांधी वाड्रा को कमान देना..........सीएम सरमा के लिए एक बड़ी चुनौती मान रही कांग्रेस
नई दिल्ली । कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि असम में एक निष्क्रिय आंतरिक नेटवर्क, इस पार्टी संभावित स्लीपर सेल कहती है, वे अभी भी सक्रिय है। वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जो कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए, अमस में कांग्रेस ढांचे के भीतर कुछ व्यक्तियों पर अपना प्रभाव बनाए हुए हैं। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी वाड्रा की अधिक सक्रिय भागीदारी इस प्रभाव को बेअसर करने में मददगार साबित होगी।
बीते असम विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर्दे के पीछे काफी सक्रिय रहीं, हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आईं। तब कांग्रेस नेता भूपेश बघेल राज्य के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत थे। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि प्रियंका का सशक्त नेतृत्व, रणनीतिक स्पष्टता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने की क्षमता संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करने और शर्मा के जाने के बाद बचे किसी भी अप्रत्यक्ष प्रभाव का मुकाबला करने में सहायक हो सकती है।
पार्टी का असम पर दुबारा ध्यान केंद्रित करना स्पष्ट राजनीतिक गणनाओं से प्रेरित है। पश्चिम बंगाल, जहाँ कांग्रेस का कोई मजबूत संगठनात्मक आधार नहीं है, या तमिलनाडु, जहाँ वह एक कनिष्ठ सहयोगी बनी हुई है, के विपरीत, पार्टी नेताओं के अनुसार, असम कांग्रेस को वापसी का मौका देता है। प्रियंका गांधी केरल में संगठनात्मक जिम्मेदारी भी नहीं ले सकतीं, क्योंकि आंतरिक नियमों के अनुसार नेता उन राज्यों में पद धारण नहीं कर सकते जहाँ से वे सांसद हैं, क्योंकि इससे निहित स्वार्थों की आशंका पैदा हो सकती है। इन सीमाओं को देखते हुए, असम प्रियंका गांधी के लिए कमान संभालने और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने के लिए सबसे आशाजनक क्षेत्र के रूप में उभरा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रियंका की उपस्थिति से पार्टी को एक मजबूत छवि बनाने, लगातार सुर्खियों में बने रहने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी। उनकी भागीदारी से असम में सत्ता पुनः प्राप्त करने के प्रति पार्टी की गंभीरता का संकेत मिलेगा और गठबंधन सहयोगियों को भी गति मिलेगी। पिछले विधानसभा चुनावों में, महाजोत गठबंधन को 43.68 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एनडीए को 44.51 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। एनडीए ने 75 सीटें जीतीं, जबकि महाजोत को 50 सीटें मिलीं।

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