महासमुंद में बिहान योजना से महिलाएं हो रही आत्मनिर्भर : खल्लारी में महिला आजीविका दुकान से रोजगार हुआ सुनिश्चित
रायपुर : महासमुंद जिले के खल्लारी क्षेत्र में बिहान योजना के तहत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा संचालित आजीविका दुकान से रोजगार सुनिश्चित हो रहा है। बिहान अंतर्गत गठित ओम सत्य साईं स्वसहायता समूह की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाते हुए इस दुकान को स्थापित किया है, जो न केवल स्थानीय उत्पादों का विक्रय केंद्र बन रही है बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है।
तिरंगा ग्राम संगठन भीमखोज खल्लारी से जुड़ीं महिलाएं, जिनमें संतोषी सिंह (अध्यक्ष), वंदना यादव और माला यादव (सदस्य) शामिल हैं, इस पहल की अगुवाई कर रही हैं। दुकान में सिलाई कार्य से बने उत्पाद, खिलौने, साबुन, सूपा, सारी फिनाइल, मिट्टी के बर्तन और अन्य हस्तशिल्प सामग्री का विक्रय किया जा रहा है। ये उत्पाद पूरी तरह से महिला समूहों द्वारा निर्मित हैं, जो उन्हें सीधे बाजार तक पहुंचाने का माध्यम प्रदान कर रही है। इससे महिलाओं को बिचौलियों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती और वे अपने उत्पादों से सीधा लाभ कमा सकती हैं। समूह की महिलाओं ने बताया कि उनके दुकान में जिले के विभिन्न स्व सहायता समूहों के उत्पादों को लाकर विक्रय किया जाता है।
बिहान योजना, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का हिस्सा है, ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन के अवसर प्रदान करती है। इस तरह की दुकानें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। संतोषी सिंह ने बताया कि यह दुकान हमारे लिए सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का प्रतीक है। हम अन्य महिलाओं को भी इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। विगत दिनों जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हेमंत नंदनवार द्वारा दुकान का शुभारम्भ किया गया।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप, पुलिस ने शुरू की तलाश
मोहन यादव ने जताई नाराजगी, कांग्रेस नेताओं से जवाब तलब
नीतीश कुमार को लेकर उठे सवालों पर मंत्री का पलटवार
118 किमी की धार्मिक यात्रा, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
10 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न, सामाजिक एकता का संदेश
ईरानी उपराष्ट्रपति की चेतावनी से डिप्लोमैटिक हलचल तेज
नक्सल मुक्त बस्तर की ओर कदम, सुरक्षा बलों को मिली कामयाबी
लखीमपुर खीरी में ऐतिहासिक कदम, थारू समुदाय को मिली जमीन की मालिकाना हकदारी