अंतरराष्ट्रीय बाजार में दान किए गए बालों की भारी मांग
नई दिल्ली । दक्षिण भारत के कई बड़े मंदिरों, खासकर तिरुपति बालाजी जैसे प्रसिद्ध धामों में बाल चढ़ाने की परंपरा बेहद मजबूत है। यहां पुरुष, महिलाएं और यहां तक कि बच्चे भी मन्नत पूरी होने पर मुंडन करवाते हैं या अपने बाल अर्पित करते हैं। भक्तों के लिए यह पूरी तरह धार्मिक और भावनात्मक प्रक्रिया होती है। माना जाता है कि बालों का दान करने से अहंकार का त्याग होता है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। लेकिन मंदिर में अर्पित होने के बाद ये बाल केवल धार्मिक वस्तु बनकर नहीं रह जाते, बल्कि यहीं से एक बड़े वैश्विक कारोबार की शुरुआत होती है। मंदिरों में जमा किए गए बालों को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद इन्हें साफ-सुथरे ढंग से धोया जाता है, छांटा जाता है और फिर प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में बालों की क्वालिटी के हिसाब से उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है।
सबसे अच्छी क्वालिटी के बाल विग और हेयर एक्सटेंशन बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। भारतीय मंदिरों से निकले ये बाल अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया समेत दुनिया के 55 से अधिक देशों तक भेजे जाते हैं। इस कारोबार की कीमत अरबों रुपये में आंकी जाती है। खास बात यह है कि इन बालों की मांग इसलिए भी ज्यादा रहती है क्योंकि इन्हें “वर्जिन हेयर” माना जाता है, यानी इन पर किसी तरह का केमिकल ट्रीटमेंट नहीं होता। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी इंडस्ट्री में भारतीय मंदिरों से आए बाल सबसे महंगे और भरोसेमंद माने जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया से होने वाली आय सीधे मंदिर ट्रस्ट के पास जाती है।
मंदिरों को मिलने वाले इस मुनाफे का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में किया जाता है। इससे मंदिरों के विकास, रखरखाव, अन्नदान, शिक्षा, अस्पताल और गरीबों की मदद जैसे काम होते हैं। यानी भक्त जिस श्रद्धा से अपने बाल भगवान को चढ़ाता है, वही आस्था आगे चलकर एक वैश्विक उद्योग का रूप ले लेती है और समाज के बड़े हिस्से के लिए सहारा बनती है। इस तरह मन्नत के रूप में चढ़ाए गए बाल केवल धार्मिक प्रतीक नहीं रहते, बल्कि आस्था और अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली एक अनोखी कड़ी बन जाते हैं। मालूम हो कि भारत में जब मनचाही इच्छा पूरी हो जाती है, तो लोग भेंट स्वरूप कुछ न कुछ भगवान को अर्पित करते हैं। इसी परंपरा में कई भक्त अपने बाल भी चढ़ाते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है कि बाल दान करने से व्यक्ति अपने जीवन की नकारात्मकता छोड़ देता है और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त करता है।

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