10 साल पहले जापान में हुई एक घटना के बाद रोबोट्स को लेकर सवाल हुए खड़े
टोक्यो। क्या रोबोट्स भविष्य में इंसानों की जगह ले सकते हैं। यह सवाल लंबे समय से चर्चा में है। हालांकि भविष्य क्या होगा, यह वक्त बताएगा, लेकिन वर्तमान की हकीकत यह है कि आज दुनिया में करोड़ों रोबोट सक्रिय हैं। फैक्ट्रियों से लेकर होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अस्पतालों तक ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है।
आज से करीब एक दशक पहले जापान में दुनिया का पहला ‘रोबोट होटल’ शुरू हुआ था। यह होटल भविष्य की झलक जैसा था। रिसेप्शन पर इंसानों की जगह मुस्कुराते डायनासोर रोबोट्स मेहमानों का स्वागत करते थे। बिना चेहरे वाली मधुर आवाज चेक-इन प्रक्रिया समझाती थी और रोबोटिक पोर्टर मेहमानों का सामान उठाकर कमरों तक पहुंचाते थे। इस अनोखे अनुभव ने दुनियाभर के पर्यटकों का ध्यान खींचा और होटल अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। लेकिन यह उत्साह ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। कुछ ही महीनों में प्रयोग की सीमाएं सामने आने लगीं। होटल प्रबंधन और पर्यटकों दोनों के लिए रोबोट्स आकर्षण से ज्यादा परेशानी साबित हो रहे थे।
सबसे बड़ी समस्या कस्टमर अनुभव को लेकर सामने आई। रोबोट्स अलग-अलग भाषाओं और उच्चारणों को ठीक से समझ नहीं पाते थे। सामान लाने-ले जाने में तकनीकी गड़बड़ियां होती थीं और गलत कमांड फॉलो करने की शिकायतें आम हो गईं। रिसेप्शन पर तैनात रोबोट जटिल सवालों, बुकिंग में बदलाव या अचानक पैदा हुई समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे थे। हर छोटी-बड़ी दिक्कत पर इंसानी हस्तक्षेप जरूरी हो जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे स्पष्ट हो गया कि रोबोट्स तयशुदा निर्देशों का पालन कर सकते हैं, लेकिन भावनाओं, सहानुभूति और रचनात्मक सोच के मामले में वे इंसानों की बराबरी नहीं कर सकते। इस प्रयोग की विफलता ने दुनिया को ऑटोमेशन को लेकर कई अहम सबक दिए। सबसे बड़ा सबक यह कि मशीनों पर अति-निर्भरता हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम नहीं देती। खासकर सर्विस सेक्टर में, जहां इंसानी संपर्क, संवेदनशीलता और समस्या-समाधान सबसे अहम होते हैं।
आज, उस प्रयोग को लगभग 10 साल हो चुके हैं। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स के अनुसार, दुनिया में करीब 40 लाख फैक्ट्री रोबोट्स और 3.6 करोड़ सर्विस रोबोट्स सक्रिय हैं, जिनकी संख्या हर साल लगभग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। चीन, जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जर्मनी इस क्षेत्र में सबसे आगे हैं।
भारत सहित कई देशों में मॉल्स, होटल्स और रेस्टोरेंट्स में सर्विंग, डिलीवरी और रिसेप्शन रोबोट्स का प्रयोग हो रहा है। हालांकि अनुभव ने यह साफ कर दिया है कि रोबोट्स इंसानों के सहायक हो सकते हैं, लेकिन उनका पूर्ण विकल्प नहीं। दुनिया के पहले रोबोट होटल की कहानी हमें यही सिखाती है कि तकनीक की रफ्तार जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है उसकी समझदारी भरी सीमाएं। ऑटोमेशन का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इंसानी भूमिका अब भी अपरिहार्य है।

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