लोकसभा में लौटते ही ओम बिरला ने नियमों पर दिया जोर
ओम बिरला। लोकसभा में अध्यक्ष पद दोबारा संभालने के बाद ओम बिरला ने कहा कि चाहे सदन के नेता हों, या प्रतिपक्ष के नेता सभी को नियमों के तहत बोलने का अधिकार है. प्रतिपक्ष के नेता सदन से ऊपर नहीं हैं. सदन नियमों से चलता है. ये नियम सरकार या विपक्ष ने नहीं बनाए, मुझे विरासत में मिले हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि अध्यक्ष के निर्णय से कोई भी सदस्य सहमत-असहमत हो सकता है, क्योंकि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए मुझे कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं. भेदभाव के आरोपों पर ओम बिड़ला ने कहा कि आसन के पास कभी माइक ऑन-ऑफ करने का बटन नहीं होता, जो सदस्य नियम के तहत बोलते हैं, उन्हीं का माइक ऑन रहता है।
अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बनने का प्रयास
ओम बिड़ला ने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है. यहां पर हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं को बड़ी ही उम्मीदों के साथ लेकर आता है. ऐसे में हमारी कोशिश रहती है, कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखें. हमारा प्रयास रहा है कि लोकसभा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बन सकें।
पीएम को भी लेनी होती है अनुमति: ओम बिड़ला
ओम बिड़ला ने भेदभाव के आरोपों पर कहा कि सदन के नेता, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री या अन्य सदस्य सभी को सदन के नियमों और प्रक्रिया के तहत बोलने का अधिकार है. सभी के लिए समान नियम लागू होते हैं, कोई भी सदस्य नियम से ऊपर नहीं है. स्पीकर ने पीएम का जिक्र करते हुए कहा कि चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही क्यों ना हों. अगर उनको भी वक्तव्य देना है, तो अध्यक्ष से अनुमति लेनी होती है।

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