इंडोनेशिया के निकेल और खनिज भंडार से बढ़ेगी रणनीतिक अहमियत
नई दिल्ली। अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुआ नया व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देता है, जिसमें ऊर्जा, खनिज संसाधन और रणनीतिक सहयोग केंद्र में हैं। इस डील के तहत इंडोनेशिया ने अपने महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र खासकर निकेल और रेयर अर्थ में अमेरिकी निवेश के लिए दरवाजे खोलने पर सहमति दी है। वहीं अमेरिका ने इंडोनेशियाई उत्पादों पर प्रस्तावित 32% टैरिफ घटाकर 19% कर दिया है और कई प्रमुख वस्तुओं को शून्य-शुल्क पहुंच भी दी है।
खनिज और सप्लाई चेन पर फोकस
इंडोनेशिया, जो दुनिया का सबसे बड़ा निकेल उत्पादक है, इलेक्ट्रिक वाहन और क्लीन एनर्जी के लिए जरूरी संसाधनों का बड़ा स्रोत है। समझौते के तहत अमेरिका को खनन से लेकर प्रोसेसिंग और निर्यात तक व्यापक निवेश अवसर मिलेंगे। इससे अमेरिका की कोशिश है कि वह चीन पर निर्भरता कम कर सके, जो अभी इंडोनेशिया के खनिज सेक्टर में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
डील के तहत क्या होगा?
डील के तहत इंडोनेशिया करीब 15 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद जैसे कच्चा तेल, एलपीजी और गैसोलीन खरीदेगा। साथ ही, अमेरिकी कोयले के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट कोस्ट से एक्सपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने में भी निवेश करेगा। दोनों देश छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर (SMR) परियोजनाओं पर भी सहयोग करेंगे।
इंडोनेशिया किन देशों के बीच संतुलन साधने को कोशिश कर रहा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समझौता इंडोनेशिया की उस रणनीति को दिखाता है, जिसमें वह अमेरिका और चीन दोनों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। चीन पहले से ही इंडोनेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और खनिज व कोयला क्षेत्र में उसकी मजबूत पकड़ है।
ऊर्जा ट्रांजिशन पर असर
डील से इंडोनेशिया की ऊर्जा नीति में बदलाव के संकेत मिलते हैं। जहां पहले स्वच्छ ऊर्जा और उत्सर्जन में कमी पर जोर था, अब फोकस फिर से जीवाश्म ईंधन की ओर झुकता दिख रहा है। 2023 में इंडोनेशिया की ऊर्जा खपत का करीब 78% हिस्सा कोयला, तेल और गैस से आया था, जबकि सौर ऊर्जा का विकास अपेक्षाकृत धीमा रहा है।
टैरिफ विवाद से अनिश्चितता
हालांकि, इस समझौते के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के टैरिफ फैसलों को चुनौती दिए जाने के बाद इसके लागू होने पर सवाल उठे हैं। साथ ही, इंडोनेशिया की संसद में भी इस पर मंजूरी आसान नहीं मानी जा रही, खासकर कुछ विवादित प्रावधानों को लेकर।

'दमन नहीं, संवाद चाहिए', CJP ने छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा
अंतरिक्ष से दिखा भूकंप का असर, वेनेजुएला में जमीन 2 फीट तक खिसकी
'मलेरिया मुक्त' दावों पर सवाल, बस्तर संभाग में 8426 पॉजिटिव; कांकेर में 3 बच्चों की मौत
इलाज के बाद सोनम वांगचुक की वापसी, समर्थकों से साझा किया आगे का रोडमैप
दिल्ली की भागदौड़ से ब्रेक लें, कुछ घंटों की दूरी पर हैं ये शानदार टूरिस्ट स्पॉट
बार-बार हो रही सर्दी-जुकाम की परेशानी? ट्राई करें ये आसान घरेलू काढ़ा
रादुविवि में बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव, धारा 52 लागू करने की कवायद तेज
धर्मेंद्र प्रधान पहुंचे संसद तो बीजेपी सांसदों ने संभाला मोर्चा, लगाए समर्थन के नारे
किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है संकेत, सुबह दिखने वाले इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज