ट्रंप का बयान: ईरान से युद्ध जल्द खत्म, ब्रिटिश-फ्रांसीसी प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी
वॉशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी युद्ध “ज्यादा लंबा नहीं चलेगा,” लेकिन उन्होंने इसके समाप्त होने की कोई स्पष्ट समयसीमा बताने से इंकार किया है जिससे अमरीकी रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस संघर्ष को एक संक्षिप्त “अभियान” बताया और संकेत दिया कि यह “कुछ हफ्तों” में समाप्त हो सकता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि वह बीते समय की बात कर रहे थे या आने वाले समय की। उन्होंने यह भी कहा कि अमरीका “अभी हटने के लिए तैयार नहीं” है, लेकिन “बहुत जल्द” वापसी कर सकता है।
ट्रंप ने युद्ध के बाद की योजनाओं पर पूछे जाने पर केवल सामान्य रूपरेखा दी और कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि संघर्ष के बाद ईरान “ठीक से संचालित” हो। श्री ट्रंप ने वरिष्ठ ईरानी नेताओं की हत्या पर टिप्पणी करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि इससे कूटनीति जटिल हो गयी है और “हमें नहीं पता कि बातचीत किससे करें।” नाटो को लेकर अपनी आलोचना दोहराते हुए ट्रंप ने सहयोगियों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयास का समर्थन न करने पर नाराजगी जताई और यूरोपीय देशों के रुख को “बहुत बड़ी गलती” बताया।
उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर “समर्थन नहीं दे रहे हैं, जो एक बड़ी गलती है,” जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बारे में उन्होंने कहा कि “वह जल्द ही पद छोड़ने वाले हैं।”
अमरीकी राष्ट्रपति ने इससे पहले संकेत दिया था कि पेरिस और लंदन सहित कुछ अन्य देश अमेरिकी पहल में शामिल हो सकते हैं, लेकिन फ्रांस ने कहा है कि वह नौसैनिक एस्कॉर्ट मिशन पर तभी विचार करेगा जब तेहरान के साथ तनाव कम होगा। वहीं ब्रिटेन ने सैन्य अभियानों में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है, जबकि अन्य एशियाई और यूरोपीय सहयोगी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसके विपरीत, ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की रक्षात्मक तैयारियों की सराहना की। इनमें से हालांकि किसी ने भी सार्वजनिक रूप से नौसैनिक मिशन में शामिल होने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

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