‘ताला लगाने वाले ही देते हैं ईद मुबारक’, उमर फारूक का आरोप।
कश्मीर। घाटी के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शनिवार को ईद के दिन श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रहने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताला लगाते हैं, वही सबसे पहले ‘ईद मुबारक’ की बधाई देते हैं। मीरवाइज उमर फारूक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा कि लगातार सातवें साल जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक लगी हुई है। इसके चलते मुसलमानों के लिए जश्न का दिन इस बार भी खुशी की बजाय निराशा और दुख में बदल गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
उनका कहना है कि इस तरह की पाबंदियां और नजरबंदियां न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं और विश्वास को भी ठेस पहुंचाती हैं। जामा मस्जिद श्रीनगर का एक ऐसा स्थान है जो लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। यहां आने वाले लोग न केवल नमाज अदा करते हैं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का अनुभव भी करते हैं। लेकिन इन पाबंदियों के चलते इस महत्वपूर्ण अवसर पर हजारों मुसलमानों का अधिकार सीमित किया जा रहा है।
पारिवारिक और धार्मिक जश्न अधूरा
उनका कहना है कि ईद का दिन सिर्फ इबादत का अवसर नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशी, मिलन और भाईचारे का प्रतीक भी है। जब ऐसी पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो लोगों का यह पारिवारिक और धार्मिक जश्न अधूरा रह जाता है।
ताले लगाने वाले ही देते है मुबारक
मीरवाइज उमर फारूक ने इसे समय की बड़ी विडंबना करार दिया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताले लगाते हैं, वही सबसे पहले मुसलमानों को ‘ईद मुबारक’ की बधाई देते हैं।
मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर जताई थी चिंता
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इससे पहले पिछले शुक्रवार को भी श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि रमजान के पावन महीने और ईद के दिन जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रखने के फैसले ने मुस्लिम समुदाय की खुशी और जश्न को गम में बदल दिया है।

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