बाजार में हाहाकार: खुलते ही शेयरों ने गंवाई 5 लाख करोड़ की संपत्ति
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार सुबह चौतरफा तेज गिरावट देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 1% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,200 अंक यानी 1.6% टूटकर इंट्राडे में 72,392 के निचले स्तर तक पहुंच गया। जबकि निफ्टी-50 350 अंक यानी 1.5% गिरकर दिन के निचले स्तर 22,470 तक फिसल गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के 422 लाख करोड़ रुपये से घटकर 417 लाख करोड़ रुपये रह गया।
आज शेयर बाजार क्यों गिरा?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ था, अब एक महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह तनाव जल्द खत्म होगा या नहीं। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने की अवधि बढ़ा दी थी। हालांकि, इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, बैक-चैनल और मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी शामिल हैं।अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ था, अब एक महीने से ज्यादा लंबा खिंच चुका है। अभी तक यह साफ नहीं है कि यह तनाव जल्द खत्म होगा या नहीं। पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने की अवधि बढ़ा दी थी। हालांकि, इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। लेकिन अब तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है। हालांकि, बैक-चैनल और मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है, जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में और तेजी आई है और यह 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर बनी अनिश्चितता है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति जिस होर्मुज स्ट्रेट से होती है, वह अब भी ज्यादातर शिपिंग के लिए बंद है। इससे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। हम अपनी 85-90% तेल जरूरतें आयात के जरिए पूरी करते हैं।
इंडिया VIX 28 के पार
वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 6% की तेजी आई और यह 28 के स्तर के ऊपर पहुंच गया, जो बाजार में कमजोर और अस्थिर निवेशक धारणा को दर्शाता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वोलैटिलिटी इंडेक्स की सामान्य रेंज 12 से 15 के बीच मानी जाती है। यदि यह 15 से ऊपर चला जाए, तो इसका मतलब होता है कि बाजार अगले 30 दिनों में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका को पहले से ही शामिल कर रहा है। इंडिया VIX का 28 के ऊपर पहुंचना इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में घबराहट बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका-ईरान युद्ध लंबा खिंचने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है, वैश्विक महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और दुनिया की आर्थिक विकास रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।

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