आचार संहिता उल्लंघन मामला: असम चुनाव में कुनकी चौधरी पर पुलिस की कार्रवाई, समन जारी
गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव (Assam assembly elections) के बीच सियासी माहौल और गरमा गया है। गुवाहाटी सेंट्रल सीट (Guwahati Central seat) से चुनाव लड़ रहीं युवा उम्मीदवार कुनकी चौधरी (Kunki Chaudhary) को पुलिस ने आदर्श आचार संहिता (model code of conduct) के कथित उल्लंघन के मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें पान बाजार थाने में तलब किया गया, जहां उन्होंने अपना पक्ष रखा।
कैंपेन टीम पर कार्रवाई, तीन सदस्य हिरासत में
मतदान खत्म होने के कुछ घंटों बाद पुलिस ने इस मामले में उनकी कैंपेन टीम के तीन सदस्यों को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, ये तीनों सदस्य हरियाणा के रहने वाले हैं और चुनाव नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान से 48 घंटे पहले भी क्षेत्र में मौजूद थे।
सबसे युवा उम्मीदवार पर सियासी घमासान
27 वर्षीय कुनकी चौधरी इस चुनाव की सबसे युवा उम्मीदवार हैं और असम जातीय परिषद (AJP) के टिकट पर मैदान में हैं। उनका मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय गुप्ता से है।
इस बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने चौधरी और उनके परिवार पर तीखे आरोप लगाए, जिससे यह मुकाबला और ज्यादा चर्चा में आ गया। सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर उनके परिवार पर सवाल उठाए थे।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने यह केस लोक सेवक के आदेश में बाधा डालने, चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने और जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया है। आरोप यह भी है कि मतदान के दिन भी प्रचार जारी था और सुरक्षा कर्मियों को मतदान केंद्रों के पास ले जाया गया।
चौधरी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
पूछताछ के बाद कुनकी चौधरी ने कहा कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मुझे अपना पक्ष रखने का मौका मिला। मुझे सिस्टम पर भरोसा है और जांच निष्पक्ष होगी।”
विपक्ष का आरोप-प्रशासन का दुरुपयोग
वहीं, लुरिंज्योति गोगोई ने इसे राजनीतिक दबाव बताते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
क्यों अहम है यह मामला?
गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर मुकाबला इस बार खासा दिलचस्प हो गया है। एक तरफ युवा चेहरा और उभरती राजनीति, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी दल की मजबूत पकड़—ऐसे में यह विवाद चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।

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