25 लाख का जुर्माना और आजीवन कारावास; नए कानून की कठोरता पर छिड़ी कानूनी जंग
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में हाल ही में लागू हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026’ के खिलाफ ईसाई समुदाय ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। समुदाय की ओर से क्रिस्टोफर पाल ने इस कानून के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताया है। याचिका में मुख्य रूप से अवैध धर्मांतरण के मामलों में आजीवन कारावास जैसे कठोर दंड और भारी जुर्माने के प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
नए कानून के तहत जबरन या लालच से धर्मांतरण कराने पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और सामूहिक धर्मांतरण में 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य किया गया है और इन अपराधों को गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का तर्क है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल धोखाधड़ी और दबाव से होने वाले अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए है।

'धोखेबाज भतीजे' पर CM शुभेंदु का करारा प्रहार, सेबाश्रय शिविर घोटाले में दी चेतावनी
धर्मेंद्र प्रधान विवाद के बीच मायावती का बड़ा कमेंट, पार्टी कैडर को किया सतर्क
PhonePe की आय में 11% ग्रोथ, फिर भी घाटा 62% बढ़ा
नई कार्यकारिणी के जरिए मिशन चुनाव की तैयारी, यूपी कांग्रेस जल्द करेगी बड़ा ऐलान
भारी बारिश और भूस्खलन से तबाही, जम्मू-कश्मीर में हालात गंभीर, यात्रा सस्पेंड
खंडवा में बड़ा हादसा: ब्रह्मपुरी पार्किंग के खुले सेप्टिक टैंक ने ली मासूम की जान
नकल माफिया पर योगी सरकार का शिकंजा, सीएम बोले- युवाओं के साथ अन्याय नहीं होगा
राजगढ़ हादसा: तेज रफ्तार कार तालाब में गिरी, क्रेन से निकाली गई गाड़ी
'छात्रों की आवाज जीती', टीकाराम जूली ने PM से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर करने की मांग की
धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला, इस्तीफा देकर साझा किया अपना दर्द