दिल्ली में जानवरों को खाना खिलाना पड़ा महंगा, NDMC की सख्ती बढ़ी
नई दिल्ली। राजधानी को स्वच्छ रखने और बीमारियों की रोकथाम के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने एक बड़ा अभियान छेड़ा है। एनजीटी (NGT) में सौंपी गई अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, परिषद ने खुले में बंदरों, कुत्तों और कबूतरों को खिलाने से होने वाली गंदगी को रोकने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं।
बंदरों को पकड़ने और जागरूक करने का अभियान
- रेस्क्यू ऑपरेशन: एनडीएमसी ने अब तक 2000 से अधिक बंदरों को पकड़कर उनकी चिकित्सकीय जांच कराई और उन्हें सुरक्षित रूप से 'असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य' में शिफ्ट कर दिया है।
- नया प्रयोग: बंदरों के आतंक को कम करने के लिए लंगूरों के कटआउट्स और चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
- जागरूकता: नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को समझाया जा रहा है कि बंदरों को खिलाने से उनका व्यवहार हिंसक हो सकता है।
कबूतरों और कुत्तों के लिए नई व्यवस्था
- निर्धारित फीडिंग पॉइंट्स: परिषद ने कबूतरों और कुत्तों को खिलाने के लिए विशेष स्थान (फीडिंग पॉइंट्स) तय किए हैं। कुत्तों के लिए 100 फीडिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहाँ साफ-सफाई के नियमों का पालन अनिवार्य है।
- जुर्माना और कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बरती जा रही है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच कुल 76 चालान काटे गए हैं। साथ ही, चिन्हित स्थानों से अवैध रेहड़ी-पटरी वालों को भी हटाया गया है।
साफ-सफाई और प्रशासन का रुख
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मृगांक बोरा ने बताया कि विभाग एनजीटी के निर्देशों का पूर्ण पालन कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि बंदरों को हटाए जाने से स्थानीय निवासियों ने राहत महसूस की है। शहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए यह स्वच्छता अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

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