7 दिन पहले जिस बेटे को पढ़ाई के लिए छोड़ा, उसका लहुलुहान शव लेकर घर पहुंचा स्कूल संचालक।
कानपुर: महाराजपुर क्षेत्र के गैरिया गांव में 11 वर्षीय छात्र दिव्यांश की नृशंस हत्या कर उसका शव घर के बाहर फेंक दिया गया। परिजन महज सात दिन पहले उसे लखनऊ के एक गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए छोड़कर आए थे। मासूम का शव स्कूल संचालक अपनी कार से लेकर आया और घर के पास छोड़कर फरार हो गया। मृतक के शरीर पर डंडे से पिटाई के 40 से 45 गहरे निशान मिले हैं, वहीं परिजनों ने शरीर को सिगरेट से दागने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
पिता नरेंद्र द्विवेदी की तहरीर पर पुलिस ने स्कूल संचालक कन्हैया लाल मिश्रा और कार चालक के खिलाफ हत्या व साक्ष्य मिटाने की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। नरेंद्र कुमार, जो एक निजी फैक्ट्री में कार्यरत हैं, ने बताया कि 15 अप्रैल को ही उन्होंने बेटे का दाखिला लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में कराया था।
घर के पास शव फेंककर भागे आरोपी नरेंद्र द्विवेदी का आरोप है कि बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे गुरुकुल संचालक कन्हैया मिश्रा कार से दिव्यांश का शव लेकर आया और घर से कुछ दूरी पर छोड़कर भाग निकला। बच्चे के शरीर पर रस्सी से बांधने और यातनाएं देने के स्पष्ट निशान थे। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने हंगामा किया, जिसके बाद भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
पुलिस की कार्रवाई और जांच डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता और एसीपी अभिषेक पांडेय ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य संकलित किए हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें लखनऊ, फतेहपुर और बाराबंकी में दबिश दे रही हैं। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मासूम को दी गईं अमानवीय यातनाएं दिव्यांश के चाचा जितेंद्र द्विवेदी के अनुसार, बच्चे के हाथ-पैर बांधकर उसे बेरहमी से पीटा गया है। एसीपी चकेरी ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराया जाएगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी ताकि सत्यता सामने आ सके। इकलौते चिराग की मौत से परिवार में कोहराम मचा है और गांव के लोग आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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