आम लोगों के काम में बिचौलियों की बढ़ती दखल, प्रक्रिया हो रही प्रभावित
पूर्व कमिश्नर ने खदेड़ दिया था,अब फिर दिखने लगी वही शक्लें
जबलपुर। नगर निगम में दलालों की सक्रियता एक बार फिर बढ़ने लगी है। तत्कालीन निगमायुक्त प्रीति यादव के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और दलाली की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो बाहरी व्यक्तियों के नगर निगम मुख्यालय में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। उस समय प्रीति यादव ने स्पष्ट किया था कि नगर निगम के कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप और फाइलों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके जाने के बाद कुछ समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रही और दलाल नगर निगम परिसर से दूर रहे लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं।
दलालों की वापसी, अधिकारियों की बल्ले-बल्ले
नगर निगम के गलियारों में अब वे लोग फिर से दिखाई देने लगे हैं जिन्हें पूर्व कमिश्नर ने प्रतिबंधित किया था। इनमें से एक व्यक्ति नियमित अंतराल पर निगम कार्यालय आता है और विशेष रूप से मकान निर्माण, नक्शा पास कराने और भवन शाखा से संबंधित कार्यों की दलाली कर रहा है। सूत्रों के अनुसार नगर निगम के कुछ अधिकारियों के साथ इन दलालों के गहरे संबंध हैं। यही कारण है कि पाबंदी के बावजूद ये लोग बेखौफ होकर दफ्तरों में बैठ रहे हैं और अधिकारियों के साथ फाइलों का लेन-देन कर रहे हैं। अधिकारियों की चुप्पी और इन दलालों को मिल रहा संरक्षण चर्चा का विषय बना हुआ है।
अतिक्रमण विभाग वसूली का खेल
दलालों की सक्रियता केवल भवन शाखा तक सीमित नहीं है बल्कि अब इन्होंने अतिक्रमण विभाग में भी अपनी पैठ बना ली है। शहर में चल रहे विभिन्न गोरखधंधों और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के नाम पर ये दलाल वसूली का काम कर रहे हैं। अतिक्रमण विभाग के कुछ अधिकारियों के नाम पर शहर भर से अवैध वसूली की जा रही है। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े निर्माण कर्ताओं तक इन दलालों का जाल फैला हुआ है। यह दलाल निगम के ही कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बतौर एजेंट काम कर रहे हैं जिससे आम जनता के जायज काम अटक रहे हैं और दलालों के माध्यम से आने वाली फाइलें तत्काल निपटाई जा रही हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
पूर्व निगमायुक्त प्रीति यादव के सख्त फैसलों को ठंडे बस्ते में डालने से नगर निगम की छवि धूमिल हो रही है। आम नागरिकों की सुनवाई नहीं हो रही है जबकि दलाल अधिकारियों के चेंबर में सीधा दखल रख रहे हैं। शहर में बढ़ते अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों के पीछे भी इन दलालों की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। नगर निगम प्रशासन की इस ढिलाई के कारण भ्रष्टाचार का पुराना तंत्र फिर से जीवित हो गया है। यदि समय रहते इन बाहरी तत्वों पर दोबारा पाबंदी नहीं लगाई गई और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो जाएंगी।

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