विजय की TVK का धमाका, तमिलनाडु में सभी दलों को पीछे छोड़ बनाई बढ़त
चेन्नई: तमिलनाडु की सियासत में एक नया इतिहास रचते हुए अभिनेता विजय की पार्टी 'तमिझगा वेत्री कज़गम' (TVK) ने अपने पहले ही चुनावी समर में जबरदस्त धमक दिखाई है। फिल्मी पर्दे से राजनीति के मंच पर उतरे विजय ने न केवल दो सीटों पर व्यक्तिगत जीत हासिल की, बल्कि उनकी पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंचकर राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 107 सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत कर टीवीके ने स्थापित द्रविड़ दलों के किलों को हिला दिया है। हालांकि, 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए आवश्यक 117 के आंकड़े से महज 10 कदम दूर रहने के कारण अब तमिलनाडु की राजनीति 'जोड़-तोड़' और नए गठबंधन के दिलचस्प दौर में प्रवेश कर गई है।
राष्ट्रीय नेताओं की बधाई और चुनावी समीकरण
विजय की इस ऐतिहासिक सफलता ने दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से विजय को शुभकामनाएं देते हुए तमिलनाडु की प्रगति के लिए केंद्र के सहयोग का भरोसा दिलाया, तो वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी व्यक्तिगत रूप से बात कर टीवीके के प्रदर्शन की सराहना की। इन शुभकामनाओं ने विजय के कद को रातों-रात राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया है। चूंकि टीवीके ने यह चुनाव बिना किसी पूर्व गठबंधन के अकेले लड़ा था, इसलिए अब विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन 10 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना है, जो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा सकें।
विचारधारा की चुनौती और गठबंधन की राह
विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि वे सांप्रदायिक राजनीति के विरोधी हैं और उन्होंने भाजपा को अपना वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताया था। ऐसी स्थिति में एनडीए के साथ गठबंधन की संभावनाएं नगण्य हैं। दूसरी ओर, डीएमके और एआईएडीएमके जैसी बड़ी पार्टियों से दूरी बनाए रखना उनकी नई राजनीतिक पहचान के लिए जरूरी है। जानकारों का मानना है कि विजय अब वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय संगठनों को साधने की कोशिश करेंगे। विशेष रूप से कांग्रेस की भूमिका यहां महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि विजय के पिता ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस को सत्ता में साझेदारी का न्योता दिया है। यदि कांग्रेस और अन्य छोटे दल साथ आते हैं, तो विजय के नेतृत्व में एक वैकल्पिक विचारधारा वाली सरकार का रास्ता साफ हो सकता है।
सत्ता की साझेदारी और भविष्य का रोडमैप
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अब गेंद विजय के पाले में है। जहां एक ओर कांग्रेस के भीतर डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके को समर्थन देने पर मंथन चल रहा है, वहीं विजय के लिए अपनी 'द्रविड़ियन-सेक्युलर' छवि को बचाए रखते हुए बहुमत जुटाना एक अग्निपरीक्षा की तरह है। यदि वे छोटे दलों और निर्दलीयों को एक मंच पर लाने में सफल रहते हैं, तो तमिलनाडु दशकों पुरानी 'दो-दलीय' व्यवस्था से बाहर निकलकर एक नए युग की शुरुआत करेगा। राजनीतिक पंडितों की नजरें अब विजय के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे अपनी विचारधारा से समझौता किए बिना सत्ता का समीकरण कैसे सुलझाते हैं।

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