सभी 13 जिलों में QRT टीमें तैनात, दिल्ली मानसून-ready
नई दिल्ली: देश की राजधानी में आगामी मानसून के सीजन के दौरान अतिवृष्टि और चक्रवाती हवाओं के कारण उत्पन्न होने वाली आकस्मिक आपदाओं से निपटने के लिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। इसके तहत दिल्ली के सभी तेरह जिलों में विशेष 'त्वरित प्रतिक्रिया टीमों' (क्यूआरटी) का गठन कर उन्हें पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। इन विशेष सैन्य और अर्धसैनिक तर्ज पर काम करने वाले दस्तों का मुख्य उद्देश्य भारी बारिश के दौरान पैदा होने वाली आपातकालीन परिस्थितियों को तत्काल नियंत्रित करना और महानगर के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
चौबीसों घंटे मुस्तैदी और तीन पालियों में काम करेगी टीमें
प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार यह नई आपातकालीन व्यवस्था तत्काल प्रभाव से पूरी दिल्ली में लागू कर दी गई है जो आगामी आदेश तक निरंतर जारी रहेगी। ये सभी त्वरित प्रतिक्रिया टीमें संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) के प्रत्यक्ष नियंत्रण और निगरानी में काम करेंगी। मानसून के चार महीनों के दौरान किसी भी समय आने वाली आपदा से निपटने के लिए इन टीमों की कार्यप्रणाली को तीन अलग-अलग पालियों (शिफ्टों) में विभाजित किया गया है, जिससे राजधानी के भीतर चौबीसों घंटे कड़ा पहरा रहेगा और किसी भी समय सूचना मिलने पर यह दस्ता बिना पल गंवाए राहत कार्य के लिए रवाना हो सकेगा।
आधुनिक उपकरणों की मदद से यातायात बहाली को प्राथमिकता
बरसात के मौसम में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश के चलते विशालकाय पेड़ों के टूटने या जड़ से उखड़ने की घटनाएं बेहद आम हो जाती हैं, जिससे न केवल मुख्य मार्गों पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है बल्कि जान-माल के नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है। इस गंभीर समस्या से पार पाने के लिए इन टीमों को अत्याधुनिक कटर, क्रेन और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों से लैस किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जैसे ही किसी मार्ग पर पेड़ गिरने या अवरोध पैदा होने की सूचना प्राप्त होगी, इन टीमों को न्यूनतम प्रतिक्रिया समय के भीतर मौके पर पहुंचकर मलबे को हटाना होगा ताकि सड़कों पर वाहनों की रफ्तार न थमे।
जलभराव और लंबे जाम की समस्या से मिलेगी बड़ी राहत
प्रशासन और दिल्ली सरकार की इस संयुक्त मुहिम का एकमात्र मूल उद्देश्य मानसून के दौरान राजधानी की सड़कों पर लगने वाले भीषण जाम और जलभराव की समस्या से दिल्लीवासियों को स्थाई निजात दिलाना है। जलभराव के संवेदनशील पॉइंट्स पर भी इन टीमों की पैनी नजर रहेगी ताकि ड्रेनेज सिस्टम ब्लॉक होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक उपाय किए जा सकें। अधिकारियों का मानना है कि इस बार विकेंद्रीकृत स्तर पर जिलावार टीमों के गठन से आपदा प्रबंधन की गति पहले से कहीं अधिक तेज होगी और स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं का त्वरित समाधान ढूंढा जा सकेगा, जिससे आम जनता को जलभराव के संकट से जूझना नहीं पड़ेगा।

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