सैदुलाजाब दर्दनाक हादसे के बाद फूटा एलजी का गुस्सा: पूछा- आंखें मूंदकर क्यों बैठा था तंत्र, जिम्मेदार अधिकारियों पर तय हो जवाबदेही
नई दिल्ली | सैदुलाजाब इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के जमींदोज होने के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) तरनजीत सिंह संधू ने नगर निगम (एमसीडी) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने एमसीडी के आला अफसरों के साथ एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर अनधिकृत निर्माण, जर्जर ढांचों की सुरक्षा और लचर सफाई व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल पूछे। उपराज्यपाल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि प्रशासनिक तंत्र में नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि दिल्ली को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए अब जवाबदेही तय की जाएगी।
अवैध निर्माण पर तुरंत रोक और मानसून से पहले नालों की सफाई का अल्टीमेटम
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने दिल्ली के भवन नियमों (बाय-लॉज) की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में चल रहे अवैध निर्माण व इमारतों के अवैध विस्तार के खिलाफ एक निश्चित समय सीमा के भीतर कानूनी कार्रवाई की जाए। ऐसी दर्दनाक घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा हैं, इसलिए जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरना तय है। इसके साथ ही, आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए प्रमुख ड्रेनेज सिस्टम और नालों से गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) के काम को बारिश शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है।
सड़कों की बदहाली और चरमराई सफाई व्यवस्था पर जताई गहरी नाराजगी
शहर की बुनियादी सुविधाओं पर बात करते हुए उपराज्यपाल ने दिल्ली की टूटी सड़कों, बदहाल फुटपाथों और जगह-जगह लगे कचरे के ढेरों पर सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने प्रदूषण और उड़ती धूल पर नियंत्रण पाने के लिए लोक निर्माण विभाग और निगम को निर्देश दिए कि वे सड़कों व फुटपाथों की मरम्मत के काम में तेजी लाएं। इसके अलावा, कचरा संग्रहण (कूड़ा उठाने) और उसके वैज्ञानिक निस्तारण की पूरी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने को कहा। उन्होंने दो टूक कहा कि आम नागरिकों की सहूलियत और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में अधिकारियों की सुस्ती बर्दाश्त से बाहर है।
पीएम-उदय योजना में तेजी लाने और जनभागीदारी से पार्कों को चमकाने की रणनीति
बैठक के आखिरी चरण में दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को मालिकाना हक देने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम-उदय' योजना की प्रगति रिपोर्ट जांची गई। उपराज्यपाल ने इस योजना के क्रियान्वयन में आ रही कछुआ चाल को दूर कर पात्र लोगों को जल्द से जल्द लाभान्वित करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त, दिल्ली के सार्वजनिक पार्कों के रख-रखाव और उनके सौंदर्यीकरण के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मॉडल को जनभागीदारी के साथ जल्द से जल्द अंतिम रूप देने को कहा, ताकि राजधानी के फेफड़ों कहे जाने वाले इन पार्कों को हरा-भरा और सुंदर बनाया जा सके।

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