जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग पर संकट की लकीर
टोक्यो। जापान में भारतीय स्वाद और खानपान की पहचान बना चुका रेस्टोरेंट उद्योग इन दिनों अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। देशभर में चल रहे करीब 5,000 भारतीय रेस्टोरेंट पर बंद होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लगातार बढ़ती लागत, सरकार के सख्त नियम और काम करने वाले कर्मचारियों (श्रमिकों) की भारी कमी इस संकट की मुख्य वजह बनकर उभरे हैं। जापान में रहने वाले लगभग 69 हजार भारतीयों में से एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़ा हुआ है। भारतीय और नेपाली समुदायों द्वारा चलाए जाने वाले ये रेस्टोरेंट जापानी शहरों में अपनी खास करी और मसालेदार व्यंजनों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन अब इनका अस्तित्व ही दांव पर लग गया है।
वीजा और रोजगार के सख्त नियमों की दोहरी मार
इस संकट की सबसे बड़ी वजह जापान सरकार द्वारा विदेशी कर्मचारियों को लेकर नियमों को कड़ा करना है। पहले के समय में कुशल विदेशी कारीगरों और रसोइयों (शेफ) को काफी आसानी से वीजा मिल जाता था, लेकिन अब सरकार ने स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) और रोजगार से जुड़ी शर्तों को बेहद सख्त कर दिया है। इसके साथ ही, रेस्टोरेंट मालिकों पर टैक्स और कागजी कार्रवाई (प्रशासनिक खर्च) का बोझ भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। कई छोटे व्यवसायियों का दर्द है कि मंदी के कारण उनकी कमाई लगातार घट रही है, जबकि दुकानों का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य जरूरी खर्च लगातार आसमान छू रहे हैं।
नेपाली कर्मचारियों की कमी से थमी रफ्तार
जापान में भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग की सफलता के पीछे नेपाली कर्मचारियों की भी एक बहुत बड़ी भूमिका रही है। अमूमन इन रेस्टोरेंटों में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी नेपाल से आते हैं, लेकिन वीजा नियमों में हुए हालिया बदलावों के कारण अब नए श्रमिकों का जापान आना बेहद मुश्किल हो गया है। इस वजह से छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट मालिकों के पास काम करने वाले लोगों का टोटा पड़ गया है और वे भारी दबाव में काम कर रहे हैं।
आजीविका और भारतीय पहचान पर संकट
इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और कारोबारियों का मानना है कि यदि जापान सरकार ने इन कड़े नियमों में जल्द ही कोई ढील या राहत नहीं दी, तो आने वाले कुछ ही सालों में हजारों भारतीय रेस्टोरेंट हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसा होने से न केवल वहां रह रहे हजारों लोगों की आजीविका और रोजगार छिन जाएगा, बल्कि जापान की संस्कृति में घुल-मिल चुकी भारतीय खानपान की खास पहचान को भी एक बड़ा और गहरा झटका लगेगा।

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