PMAY में कथित गड़बड़ी का मामला गरमाया, जांच टीम ने शुरू की पड़ताल
सक्ति: छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ति जिले के अंतर्गत आने वाली बाराद्वार नगर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर एक बहुत बड़ा घोटाला और विवाद सामने आया है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड (सरकारी कागजातों) में कथित रूप से हेरफेर और कूट रचना करके सैकड़ों अपात्र भूखंडों पर नियम विरुद्ध तरीके से आवास स्वीकृत कराने का खेल खेला गया। इस गंभीर गड़बड़ी की लिखित शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने आनन-फानन में एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन कर पूरे मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
288 में से 246 आवासों की फाइलों पर खड़ा हुआ गंभीर विवाद
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नगर पंचायत बाराद्वार में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कुल 288 मकानों की स्वीकृति के लिए विभागीय दस्तावेज तैयार किए गए थे। इनमें से चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 246 आवास ऐसे भूखंडों (जमीनों) पर प्रस्तावित कर दिए गए, जो सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में 'घास मद' (चारागाह) और 'शासकीय भूमि' के रूप में दर्ज थे।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भू-माफियाओं और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की साठगांठ से इन जमीनों को रिकॉर्ड में 'आबादी भूमि' (रहवासी क्षेत्र) दर्शाकर आवास योजना के लिए पात्र बना दिया गया। इसके बाद इसकी अंतिम मंजूरी के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने दी शिकायत, जांच टीम को सौंपे साक्ष्य
नगर पंचायत के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक राय ने इस पूरे मामले को उजागर करते हुए जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत की है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि सरकारी जमीन को हड़पने और योजना का नाजायज लाभ उठाने के लिए सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई है। शिकायत के बाद हरकत में आई जांच टीम ने नगर पंचायत और तहसील दफ्तर से भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने धांधली से जुड़े कई पुख्ता सबूत अधिकारियों को सौंप दिए हैं।
अध्यक्ष के बयान से गरमाई सक्ति जिले की राजनीति
इस मामले ने उस समय भारी राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब नगर पंचायत अध्यक्ष नारायण कुर्रे ने मीडिया के सामने एक विवादित बयान दे दिया। उन्होंने वर्तमान में प्रस्तावित जमीनों का बचाव करते हुए कहा कि इन जगहों पर कई गरीब परिवार पिछले 10 से अधिक वर्षों से झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। उन्होंने उलटा आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी यहां आबादी भूमि की बड़े पैमाने पर अवैध खरीदी-बिक्री हुई थी, जिसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अध्यक्ष के इस पलटवार के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी सख्त कार्रवाई: सीएमओ
इस पूरे मामले पर बाराद्वार नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने आधिकारिक पुष्टि की है कि आवास आवंटन और भूमि रिकॉर्ड में विसंगतियों की शिकायत मिली है। सीएमओ के अनुसार, चूंकि यह पूरा मामला जमीन के मालिकाना हक और राजस्व विभाग से जुड़ा हुआ है, इसलिए जिलाधीश (कलेक्टर) के निर्देश पर जिला स्तरीय जांच समिति बनाई गई है। जांच दल की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद नियमानुसार दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) सहित आगे की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस खुलासे के बाद से ही जिले के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा हुआ है।

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