बरगी डैम हादसे की जांच में तेजी, आयोग जल्द सौंप सकता है रिपोर्ट
जबलपुर: बरगी बांध के जलाशय में हुए क्रूज हादसे की जांच कर रहा एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। इस बीच, मामले के शिकायतकर्ताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली और जांच के दायरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
तत्कालीन कलेक्टर के बयान दर्ज न होने पर खड़े हुए सवाल
शिकायतकर्ताओं ने आयोग के सामने मुख्य रूप से यह आपत्ति उठाई है कि हादसे के समय जिले की कमान संभाल रहे तत्कालीन कलेक्टर के बयान अब तक दर्ज क्यों नहीं किए गए? उनका कहना है कि पर्यटन और सुरक्षा से जुड़ी गाइडलाइंस को लागू करने की अंतिम जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। ऐसे में तत्कालीन प्रशासनिक मुखिया से पूछताछ न करना जांच में एक बड़ा अंतर (लूपहोल) छोड़ता है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए तत्कालीन कलेक्टर के बयान रिकॉर्ड पर लेना बेहद जरूरी है।
क्रूज के मेंटेनेंस और शिपिंगयार्ड की प्रामाणिकता पर संशय
जांच के दौरान क्रूज के रखरखाव (मेंटेनेंस) को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। शिकायतकर्ताओं ने यह मुद्दा उठाया है कि यह क्रूज किस शिपिंगयार्ड में मेंटेनेंस के लिए भेजा जाता था और क्या वह यार्ड इस तरह के बड़े जहाजों या क्रूज की तकनीकी जांच के लिए अधिकृत था? क्रूज की फिटनेस और उसकी तकनीकी खामियों को छुपाने की आशंका जताते हुए यार्ड की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की जा रही है।
अंतिम दौर में आयोग की कार्यवाही, जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट
तमाम आपत्तियों और बयानों के बीच न्यायिक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है। आयोग द्वारा हादसे के तकनीकी कारणों, क्रूज संचालन के नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से जुड़े साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। सभी पक्षों की दलीलें और गवाहियां पूरी होने के बाद, यह जांच रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगामी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।

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