बालोद NHM भर्ती मामला: एक इस्तीफा, 10 संदिग्ध चयन और 41 दिन की चुप्पी ने बढ़ाया विवाद
बालोद| छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत हाल ही में संपन्न हुई सपोर्ट स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर और डेंटल असिस्टेंट के पदों की भर्ती प्रक्रिया अब पूरी तरह से विवादों के घेरे में आ गई है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने, मेरिट सूची में अंकों की कथित हेराफेरी करने और विभागीय नियमों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस बीच, मेरिट सूची में चयनित एक महिला अभ्यर्थी द्वारा अचानक अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। इस औचक इस्तीफे के बाद से पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर उंगलियां उठने लगी हैं।
इस्तीफे के बाद भी बाकी 10 संदिग्धों की जांच अटकी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो रहा है कि लिखित शिकायत में जिन 11 चयनित उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाण पत्रों (एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट) को फर्जी बताते हुए संदेह जताया गया था, उनमें से एक के खुद हटने के बावजूद प्रशासन बाकी बचे 10 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की स्क्रूटनी क्यों नहीं कर रहा है?
हैरानी की बात यह है कि इस कथित धांधली की आधिकारिक शिकायत दर्ज हुए पूरे 41 दिन का लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की ओर से जांच को लेकर कोई ठोस या दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। विभाग की इस सुस्ती और चुप्पी के कारण अब मामले को दबाने और चहेतों को उपकृत करने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
क्या है पूरा भर्ती विवाद?
स्थानीय बेरोजगार युवाओं और आवेदकों का आरोप है कि इस सरकारी भर्ती में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं:
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फर्जी क्रेडेंशियल्स का उपयोग: कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन उच्च मेरिट सूची में कर दिया गया, जिन्होंने निजी संस्थाओं से फर्जी या बैक डेट में अनुभव प्रमाण पत्र बनवाकर जमा किए थे।
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अंकों का हेरफेर: आरोप है कि पात्र और योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार करने के लिए मेरिट लिस्ट तैयार करते समय अंकों की गणना में जानबूझकर बदलाव किए गए।
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नियमों की अनदेखी: विज्ञापन में जारी दिशा-निर्देशों और चयन के कड़े मापदंडों का पालन न करते हुए अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
युवाओं में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
जिले के युवाओं और आवेदकों का कहना है कि एक चयनित अभ्यर्थी का इस्तीफा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दाल में कुछ काला है। अगर प्रमाण पत्र सही थे, तो नौकरी जॉइन करने के तुरंत बाद इस्तीफा देने की नौबत क्यों आई? युवाओं ने अब जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरी चयन सूची को होल्ड पर रखकर सभी 11 संदिग्ध मामलों की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय कमेटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करने वाले स्थानीय योग्य उम्मीदवारों के साथ न्याय हो सके।

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