'विजय, स्टालिन और राहुल एक मंच पर आएं' VCK चीफ की अपील से गठबंधन की अटकलें तेज
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बेहद अप्रत्याशित गठबंधन की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। केंद्र में विपक्षी एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य के दो प्रमुख धुर विरोधी दल, डीएमके (DMK) और टीवीके (TVK), एक ही मंच पर आ सकते हैं। यह राजनीतिक समीकरण तब सामने आया जब वीसीके प्रमुख और सांसद थिरुमावलवन ने प्रस्ताव दिया कि हालांकि ये दोनों दल तमिलनाडु में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला करने के लिए 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के अंतर्गत एक साथ आ सकते हैं।
विपक्षी एकता और राष्ट्रीय हितों पर जोर
इस प्रस्ताव को कांग्रेस का भी समर्थन मिला है। कांग्रेस सांसद जोथिमणि सेन्नीमलाई का कहना है कि यह मुद्दा संकीर्ण दलीय राजनीति से ऊपर उठकर देश के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र के समक्ष खड़ी चुनौतियों और संस्थाओं की स्वायत्तता को बचाने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, निजी राजनीतिक हितों को दरकिनार कर व्यापक विपक्षी एकता का निर्माण करना ही देशहित में एकमात्र विकल्प है, जो भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने में सक्षम हो सकता है।
बदलते राजनीतिक समीकरण और चुनावी इतिहास
तमिलनाडु के चुनावी परिदृश्य का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन था, लेकिन टीवीके की निर्णायक जीत के बाद कांग्रेस ने पाला बदलकर विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन का हाथ थाम लिया था। अब सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि केंद्र की राजनीति में डीएमके और टीवीके का एक साथ आना भविष्य की एक बड़ी रणनीति हो सकती है। हालांकि डीएमके ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट रखने की कवायद में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लोकतंत्र की खूबसूरती है वैचारिक स्वतंत्रता
टीवीके के मंत्री राज मोहन ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'लोकतंत्र की खूबसूरती' करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवीके अपने सहयोगियों पर कोई दबाव नहीं डालती और उनके सहयोगी दल अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र हैं। राज मोहन ने दोहराया कि भाजपा उनकी वैचारिक विरोधी है, जिसके चलते राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के साथ जाने के विकल्प पूरी तरह खुले हुए हैं। यदि डीएमके और टीवीके भाजपा के खिलाफ एक ही राष्ट्रीय मंच साझा करते हैं, तो यह दक्षिण भारतीय राजनीति का एक नया और अप्रत्याशित अध्याय होगा।

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