RPP-NPF विलय से नगालैंड की राजनीति में नया मोड़, CM रियो ने दिया एकता का संदेश
कोहिमा । नागालैंड की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल करते हुए राइजिंग पीपुल्स पार्टी (आरपीपी) का सत्तारूढ़ नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) में औपचारिक विलय हो गया है। कोहिमा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और एनपीएफ अध्यक्ष नेफ्यू रियो ने आरपीपी के नेताओं का पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल दो राजनीतिक दलों का संगम नहीं है, बल्कि यह विचारों, अनुभवों और लोगों की आकांक्षाओं का मिलन है, जो आने वाले समय में नागा समाज की सामूहिक आवाज को और अधिक सशक्त बनाएगा।
नागा राजनीतिक समाधान और एकता की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागा राजनीतिक मुद्दे का सम्मानजनक और जल्द समाधान उनकी सरकार और एनपीएफ की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने राज्य में 'विपक्ष रहित सरकार' के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों का लक्ष्य दशकों पुराने विवाद का स्थायी समाधान निकालना है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं नागाओं को अलग कर सकती हैं, लेकिन उनकी साझा पहचान और इतिहास को नहीं मिटा सकतीं। उन्होंने सभी नागाओं से आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने का आह्वान किया ताकि एक समावेशी राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
साझा भविष्य और मणिपुर के लिए अपील
नेफ्यू रियो ने नागा समुदाय की भावनात्मक एकता पर बल देते हुए कहा कि यद्यपि नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल और म्यांमार में फैले सभी नागाओं का एक प्रशासनिक ढांचे में आना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है, लेकिन आपसी भाईचारा और संपर्क को मजबूत करना अनिवार्य है। उन्होंने मणिपुर के नागाओं से अपील की कि वे आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एनपीएफ को मजबूती प्रदान करें, ताकि नागा हितों की रक्षा के लिए एक साझा राजनीतिक मंच तैयार हो सके। उन्होंने राजनीति को केवल टकराव का साधन न मानकर उसे विश्वास और सुलह का माध्यम बनाने पर जोर दिया।
विकास का संकल्प और आरपीपी का विलय
सरकार की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए सीएम रियो ने कहा कि राज्य का लक्ष्य शांति के साथ-साथ विकास की गति को तेज करना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और ग्रामीण आजीविका के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 2020 में अस्तित्व में आई आरपीपी ने चुनावी सुधारों का एजेंडा रखा था, लेकिन अब यह पार्टी एनपीएफ में विलीन हो गई है। विलय के बाद आरपीपी के पूर्व नेताओं को एनपीएफ के केंद्रीय संगठन में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिससे पार्टी का ढांचा और अधिक विस्तार पाएगा।

इरादों की स्याही से किशन जंगम ने लिखी सफलता की नई इबारत
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 की तैयारियां प्रारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना में 204 करोड़ रूपए से अधिक राशि के 22 विकास कार्यों की देंगे सौगात
संसद में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी टकराव, राहुल गांधी की बैठक से क्या निकलेगा हल?
CJP प्रोटेस्ट विवाद: सरकार ने कहा- संवाद के रास्ते खुले, 4 बार भेजा बातचीत का न्योता
हापुड़ में 6 साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म प्रयास, पुलिस ने दर्ज किया केस
शिक्षा पर कितना निवेश, कितना बदलाव? मोदी सरकार के 12 साल का डेटा आया सामने
झाबुआ रेल विवाद: 6 घंटे इंतजार के बाद यात्रियों ने रोका ट्रैक, बोले- लोकल को दी जा रही प्राथमिकता
अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन की सजा पर अब अगली तारीख, कोर्ट में क्यों टला फैसला?