जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर, बिहार में रजिस्ट्री से पहले होगी जांच रिपोर्ट अनिवार्य
सहरसा (नवहट्टा)। बिहार सरकार ने भूमि की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विवादमुक्त बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सम्राट चौधरी और अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने मिलकर शनिवार से जमीन रजिस्ट्री की एक बिल्कुल नई और आधुनिक व्यवस्था की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस क्रांतिकारी बदलाव से जमीन खरीदारों को धोखाधड़ी से मुक्ति मिलेगी और पूरी प्रक्रिया में अभूतपूर्व सुधार आएगा।
जमीन रजिस्ट्री से पहले मिलेगी भूमि की पूरी कुंडली
राज्य सरकार द्वारा लागू की गई इस नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी भूमि के निबंधन (रजिस्ट्री) से पहले ही खरीदार को उस संपत्ति की वास्तविक स्थिति का पता चल जाएगा। क्रेता को संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) या राजस्व अधिकारी के माध्यम से जमीन की एक विस्तृत और आधिकारिक रिपोर्ट प्रदान की जाएगी। इस अनूठी रिपोर्ट के जरिए खरीदार को पहले ही यह स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी कि संबंधित भूखंड पर किसी भी प्रकार का पुराना पारिवारिक विवाद, अदालती उलझन या कोई अन्य कानूनी संकट तो नहीं है, जिससे लोग धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकेंगे।
प्रशासनिक मुस्तैदी के लिए उप निबंधन महानिरीक्षक का पत्र
इस नई व्यवस्था को धरातल पर पूरी तरह सफल बनाने में अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों की भूमिका सबसे अहम तय की गई है। इसी गंभीरता को देखते हुए उप निबंधन महानिरीक्षक डॉ. संजय कुमार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उप निदेशक को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने उच्च अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे सभी अंचलों में यह सुनिश्चित करें कि जमीन की जांच के लिए आने वाले हर एक आवेदन का तय समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ निपटारा किया जाए, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
दस दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपना हुआ अनिवार्य
जमीन की खरीद-बिक्री करने वाले पक्षकारों को किसी भी तरह का लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने सख्त समय सीमा निर्धारित कर दी है। नई गाइडलाइन के अनुसार, जब भी कोई पक्षकार जमीन से जुड़ी संपूर्ण आवश्यक जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेगा, तो संबंधित अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे आवेदन प्राप्त होने के ठीक दस दिनों के भीतर भूमि की पूरी अद्यतन (अपडेटेड) जानकारी और जांच रिपोर्ट आधिकारिक रूप से आवेदक को उपलब्ध कराएं।
डिजिटल सॉफ्टवेयर और अधिकारियों की ट्रेनिंग से काम हुआ आसान
इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से हाईटेक और डिजिटल बना दिया गया है, जिसके लिए वर्तमान में 'ई-निबंधन' नाम के एक विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। आम जनता को घर बैठे बिना किसी बाधा के यह महत्वपूर्ण सूचनाएं मिल सकें, इसके लिए राज्य के सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। प्रशासन द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को उनके व्यक्तिगत यूजर आईडी और पासवर्ड आवंटित कर दिए गए हैं, जिससे अब इस डिजिटल व्यवस्था को पूरी गति के साथ संचालित किया जा सकेगा।

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