भाई को समोसा खिलाकर बहन को ले गए, 10 दिन तक करते रहे जुल्म; हत्या मामले में बड़ा खुलासा
गाजियाबाद| गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में एक निर्माणाधीन मॉल के अंदर सात वर्षीय बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या करने के मामले में रविवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 14 दिनों की न्यायिक कस्टडी में जेल भेज दिया है। पुलिस छानबीन में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने इस खौफनाक वारदात का खाका कई दिन पहले ही तैयार कर लिया था।
डीसीपी धवल जायसवाल के मुताबिक, अब तक की कस्टडी और जांच में दो आरोपियों—शहाबुद्दीन और विनय कुमार की भूमिका उजागर हुई है। इनमें से विनय बिहार का और शहाबुद्दीन ओडिशा का निवासी है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।
भाई को समोसा खिलाकर उलझाया, फिर बहन को साथ ले गए आरोपी
पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि इस खौफनाक घटना के बाद उनके 10 साल के बड़े बेटे ने जानकारी दी कि दोनों आरोपी पिछले करीब 10 दिनों से बच्चों से नजदीकियां बढ़ा रहे थे। वे अक्सर बच्चों को खाने-पीने की चीजें देकर बहलाते थे। शुक्रवार को भी आरोपियों ने बच्ची और उसके भाई को समोसा खिलाया था।
जिस समय बच्ची की मां अपना काम खत्म कर गार्ड के पास लौट रही थी, उस दौरान तीनों बच्चे झुग्गियों के पास खेल रहे थे। इसी बीच एक आरोपी बच्ची और उसके भाई को बहला-फुसलाकर पास की दुकान पर ले गया और करीब 15 मिनट तक वहां बिठाकर समोसा खिलाता रहा। इसके बाद उसने लड़के को घर भेज दिया और बच्ची को अपने साथ लेकर चला गया। दुकानदार ने भी इस बात की तस्दीक की है। पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में भी शाम 7:40 बजे आरोपी मासूम को साथ ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
जुर्म की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे आरोपी
घटनास्थल यानी निर्माणाधीन मॉल और झुग्गियों के बीच की दूरी महज 50 मीटर से भी कम है। वहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि शुक्रवार की रात मॉल में नाइट शिफ्ट नहीं चल रही थी। दुकान संचालक के अनुसार, अमूमन रात की शिफ्ट में ही खाने के ऑर्डर आते हैं, लेकिन उस रात कोई ऑर्डर नहीं था।
आरोप है कि इसके बावजूद दोनों आरोपी बच्ची को लेकर मॉल परिसर के भीतर दाखिल हो गए। आरोपी जिस रास्ते से ऊपर की मंजिलों पर गए, वहां बकायदा सुरक्षा गार्ड तैनात था, जिसके चलते पीड़ित परिवार ने सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, सिक्योरिटी इंचार्ज अरुण कुमार का कहना है कि मॉल की सुरक्षा में दिन और रात की पारियों में 23-23 गार्ड तैनात रहते हैं और परिसर में 8 से 10 सीसीटीवी कैमरे भी चालू हैं। उन्होंने इस ढिलाई का ठीकरा मेंटेनेंस टीम पर फोड़ दिया, जबकि मेंटेनेंस इंचार्ज दिनेश प्रताप का कहना है कि वह कभी-कभी ही साइट पर आते हैं, इसलिए उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
प्रबंधन को यह भी नहीं पता कि आरोपी कब से काम कर रहे थे
वारदात को अंजाम देने वाले शहाबुद्दीन और विनय का पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) तक नहीं कराया गया था। मॉल प्रबंधन के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि ये दोनों आरोपी साइट पर कब से काम कर रहे थे। बच्ची के पिता के मुताबिक, दोनों आरोपी करीब 10-15 दिन पहले ही वहां मजदूरी के लिए आए थे। सिक्योरिटी इंचार्ज ने इस लापरवाही से पल्ला झाड़ते हुए पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार के सिर डाल दी है।
कमरे में हर तरफ संघर्ष के निशान, पाइप से हमला कर फेंका शव
मॉल की तीसरी मंजिल के जिस कमरे में मासूम के साथ इस हैवानियत को अंजाम दिया गया, वहां की दीवारों पर कई जगहों पर खून के छींटे मिले हैं। इससे साफ अंदेशा है कि बच्ची ने खुद को बचाने के लिए आरोपियों का कड़ा विरोध किया होगा और इस दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। कमरे से कुछ ही दूरी पर लिफ्ट के लिए छोड़ी गई खाली जगह में लोहे के सरिये निकले हुए थे। आरोपियों ने लोहे के पाइप से वार कर बच्ची की जान ली और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को नीचे फेंक दिया, जो बेसमेंट-3 में बरामद हुआ।
परिसर में मिलीं बीयर की खाली केन और ग्लास
मॉल के निर्माणाधीन हिस्सों में बीयर की खाली केन और गिलास बिखरे पड़े मिले। वहां काम करने वाले अन्य मजदूरों ने आरोप लगाया कि रात में काम बंद होने के बाद असामाजिक तत्व इस परिसर में आकर शराबबाजी करते हैं और यह सब सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत या अनदेखी के कारण होता है। मजदूरों ने कहा कि वे ठेकेदार के डर से इसकी शिकायत नहीं कर पाते थे, क्योंकि उन्हें काम से निकाले जाने का डर रहता था।
पीड़ित परिजनों ने की आरोपियों को फांसी देने की मांग
पीड़ित परिवार ने इस घिनौने कृत्य में दो अन्य लोगों के भी शामिल होने का शक जताया है और उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। छोटे हरिद्वार (मुरादनगर) में बेटी का अंतिम संस्कार कर लौटे पिता ने रोते हुए आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी नजीर पेश करनी चाहिए जिससे दोबारा किसी की बेटी के साथ ऐसा न हो। पिता ने यह भी बताया कि बिल्डर पक्ष ने उन्हें 75 हजार रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया, क्योंकि उन्हें सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए।
24 घंटे के भीतर नाबालिग से बालिग साबित हुआ आरोपी, डीएनए सैंपल कलेक्ट
पकड़े गए आरोपी विनय की उम्र को लेकर पुलिस की जांच में एक नया मोड़ आया है। गिरफ्तारी के वक्त आरोपी ने खुद को नाबालिग बताकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच में वह बालिग पाया गया।
पुलिस के अनुसार, मेडिकल परीक्षण के लिए जब उसे एमएमजी अस्पताल भेजा गया, तो डॉक्टरों और दस्तावेजों के आधार पर उसकी उम्र 18 वर्ष दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे बालिग श्रेणी में रखकर कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों आरोपियों के डीएनए सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फॉरेंसिक लैब) भेजा जा रहा है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने भी पुष्टि की है कि मेडिकल रिकॉर्ड में विनय की उम्र 18 साल ही आई है।
सपा प्रतिनिधिमंडल ने जताया विरोध, निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को स्थिति का जायजा लेने घटनास्थल पर पहुंचा। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि स्थानीय निवासियों से बातचीत में पता चला है कि पुलिस ने पीड़ित परिवार को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। सपा नेताओं ने इस अमानवीय कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को कलंकित करती हैं और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष फैसल हुसैन एडवोकेट, महानगर महासचिव राजन कश्यप, विधानसभा अध्यक्ष शाहनवाज खान समेत कई स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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