साइबर ठगी: तकनीकी विकास के साथ बढ़ती चुनौतिया
नई दिल्ली । इंटरनेट और तकनीक ने हमारे जीवन को आसान और सरल बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगों ने भी नए धरातल पर कब्जा जमा लिया है। 2024 में दुनिया भर में साइबर ठगों ने 498 लाख करोड़ से अधिक की चपट लगाई। यानी, हर सेकेंड में 1.63 करोड़ की ठगी हो रही है। भारत में भी स्थिति चिंताजनक है, 2023 में 9.2 लाख से अधिक शिकायतें आईं, जिनमें 6 हजार करोड़ का घातक चपत हुआ। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साइबर ठगी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। इसमें तकनीकी सुविधाएं ही नहीं, बल्कि आर्थिक और कानूनी चुनौतियाँ भी शामिल हैं। साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम की लॉन्ड्रिंग के लिए मनी म्यूल, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल हो रहा है। सरकारें भी इस मामले पर ध्यान दे रही हैं। साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वे अरबों रुपये खर्च कर रही हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी चिंताजनक आंकड़ों की चेतावनी दी है, 2025 में भारतीयों से .2 लाख करोड़ से अधिक की ठगी की आशंका है। यह आंकड़ा बिहार के बजट के 50 फीसदी के बराबर है। ग्लोबल स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। हर साल, 514 लाख करोड़ से अधिक की ठगबंदी व्याप्त है, जिससे साइबर अपराधी अर्थव्यवस्था को भी खतरा है। इसका मतलब है कि 2024 में दुनिया भर में साइबर क्राइम से 498 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। ये आंकड़े समझाते हैं कि साइबर अपराध कितना गंभीर मुद्दा है, और हमें सावधान रहना होगा।

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