200 करोड़ के घोटाले की आशंका, क्लोन ऐप के जरिए मनरेगा में बड़ा खेल
भोपाल। ग्रामीण अंचलों में आजीविका और रोजगार की गारंटी देने वाली महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में एक बेहद गंभीर और बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस योजना के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों की हाजिरी लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले आधिकारिक 'नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम' (एनएमएमएस) का एक जाली यानी क्लोन एप्लीकेशन विकसित कर लिया गया है। इस फर्जी मोबाइल ऐप के माध्यम से बड़े पैमाने पर मजदूरों की नकली उपस्थिति दर्ज कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का अवैध भुगतान करा लिया गया, जिसे लेकर अब दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
क्लोन ऐप से 200 करोड़ के गबन का आरोप और सीबीआई जांच की मांग
इस सुनियोजित डिजिटल घोटाले की गूंज मुरैना सहित मध्य प्रदेश के कई अन्य जनपदों में सुनाई दे रही है। लांजी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस महाफर्जीवाड़े को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच देश की शीर्ष एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) से कराने की पुरजोर वकालत की है। शिकायत में यह संगीन आरोप लगाया गया है कि एनएमएमएस ऐप के साथ छेड़छाड़ कर या उसका टेंपर्ड वर्जन बनाकर पिछले दो वर्षों से बिना कार्यस्थल पर जाए, बिना किसी वास्तविक जियो-टैगिंग और प्रशासनिक सत्यापन के ही जॉब कार्ड धारकों की हाजिरी दर्ज की जा रही थी, जिससे लगभग 200 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया है।
मनरेगा योजना की समाप्ति और नई व्यवस्था की ओर कदम
तकनीकी प्रणाली में सेंधमारी कर किए जा रहे इस निरंतर घोटाले के बीच एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक जानकारी सामने आई है कि वर्तमान मनरेगा व्यवस्था आगामी 30 जून से पूरी तरह से समाप्त होने जा रही है। इस पुरानी व्यवस्था के स्थान पर सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार के सुचारू संचालन के लिए एक नई योजना 'वीबीजीरामजी' (VBGRAMJI) को धरातल पर लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा और पारदर्शिता के ऐसे कड़े मानक तय किए जाएंगे जिससे भविष्य में डिजिटल माध्यमों या मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।
मुरैना में आपराधिक मुकदमा दर्ज और डिजिटल सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न
इस व्यापक वित्तीय धांधली के उजागर होते ही प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है और मुरैना के जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 1 जून को ही दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के कड़े आदेश जारी किए थे। कलेक्टर के निर्देशानुसार खड़कपुर ग्राम पंचायत के संबंधित सहायक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। इस चौंकाने वाले मामले ने सरकारी योजनाओं को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की मौजूदा व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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