29 साल बाद भी विकास अधूरा, बुनियादी सुविधाओं को तरसता हाथरस
हाथरस। जिले के गठन को 29 वर्ष बीत जाने के बाद भी हाथरस विकास की दौड़ में पीछे नजर आ रहा है। तमाम सरकारें आईं और गईं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के बड़े प्रोजेक्ट आज तक धरातल पर नहीं उतर सके। मेडिकल कॉलेज, ट्रांसपोर्ट नगर, और कई आवश्यक जिला स्तरीय कार्यालय अब भी केवल घोषणाओं तक सीमित हैं।जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। गंभीर मरीजों को आज भी बेहतर इलाज के लिए अन्य जनपदों में रेफर करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर उपचार न मिलने के कारण बीते वर्षों में कई मरीजों की जान गई है। स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन ठोस पहल नजर नहीं आई।शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। एमजी पॉलिटेक्निक कॉलेज को अब तक इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा नहीं मिल सका है, जिससे तकनीकी शिक्षा के अवसर सीमित बने हुए हैं।शहर की यातायात व्यवस्था भी बड़ी समस्या बनी हुई है। ट्रांसपोर्ट नगर न बनने के कारण मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा विकास प्राधिकरण, पर्यटन विभाग, भूगर्भ जल विभाग, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और नेडा जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों के कार्यालय भी जनपद में स्थापित नहीं हो सके हैं।स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि वर्षों से चुनावी मंचों पर विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता। लोगों का कहना है कि सभी दलों के जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे जनपद के समग्र विकास के लिए ठोस कदम उठाएं।3 मई को जिले के स्थापना दिवस के अवसर पर एक बार फिर विकास के मुद्दे चर्चा में हैं। नाम परिवर्तन के दौर से गुजरने के बावजूद हाथरस आज भी मूलभूत सुविधाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है, जिससे आमजन में निराशा बनी हुई है।

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