ज्यादा और कम नमक का सेवन दोनों ही खतरनाक: एक्सपर्ट
वाशिंगटन। कम नमक सेवन करने को लेकर फिटनेस एक्सपर्ट और न्यूट्रिशनिस्ट कहते है कि बहुत कम नमक खाना उतना ही खतरनाक हो सकता है जितना इसका ज्यादा सेवन। उन्होंने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर के डर से लोग नमक छोड़ देते हैं, लेकिन सोडियम की अत्यधिक कमी शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाओं को प्रभावित करती है। एक्सपर्ट के अनुसार, जब शरीर में सोडियम की मात्रा कम हो जाती है, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर नमक और पानी को बचाने के लिए रेनिन, एंजियोटेंसिन और एल्डोस्टेरोन जैसे हार्मोन ज्यादा मात्रा में बनाने लगता है। इससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव आता है और नसों पर तनाव बढ़ता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर हार्ट और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार डायबिटीज के मरीजों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा होता है, क्योंकि कम सोडियम से इंसुलिन का स्तर असंतुलित हो जाता है। इससे ब्लड शुगर गिरने लगता है और शरीर को बार-बार नमक की तलब होती है। यह मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है और डायबिटीज को नियंत्रित करना मुश्किल बना देता है। एक्सपर्ट बताते है कि बहुत कम नमक खाने से हाइपोनेट्रेमिया नामक स्थिति भी हो सकती है, जिसमें खून में सोडियम का स्तर घट जाता है। इसके लक्षणों में थकान, सिरदर्द, ध्यान की कमी, भ्रम, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर मामलों में दौरे तक पड़ सकते हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिम में कई लोग व्यायाम के दौरान चक्कर या ऐंठन की शिकायत करते हैं, जिसकी मुख्य वजह सोडियम की कमी होती है।
सोडियम शरीर में नर्व सिग्नल और मांसपेशियों के संकुचन के लिए आवश्यक तत्व है। इसकी कमी से न सिर्फ व्यायाम करने की क्षमता घटती है बल्कि स्ट्रेस हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ जाता है। इससे थकान और कमजोरी महसूस होती है। कई शोधों में भी यह बात साबित हुई है कि कम नमक वाला आहार हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है, चाहे व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या हो या नहीं। पूजा ने सलाह दी कि शरीर में सोडियम की पूर्ति के लिए घर पर ही मिनरल वाटर बनाया जा सकता है।

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