संविधान ही भारत की असली ताकत: साजिद रशीदी
नई दिल्ली : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'हिंदू राष्ट्र' और 'समान नागरिक संहिता' वाले बयान पर अखिल भारतीय इमाम एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि यह देश संविधान और कानून से चलता है, न कि गीता या कुरान से।
देश के सभी धर्मों का सम्मान जरूरी
मौलाना रशीदी ने कहा, "भागवत का यह कहना कि यह हिंदू राष्ट्र है और इसमें कोई समझौता नहीं होगा, अन्य धर्मों की तौहीन है। अगर इसे मान लिया जाए तो दलित, मुसलमान, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और बाकी धर्मों का अस्तित्व ही नहीं बचेगा।"
समान नागरिक संहिता पर सवाल
साजिद रशीदी ने भागवत के कॉमन सिविल कोड के बयान पर कहा, "कानून सबके लिए बराबर हैं। रेप, डकैती और अन्य अपराध के कानून सभी पर लागू हैं। अगर मतलब मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई के पर्सनल लॉ खत्म करने का है, तो हम इसे कतई स्वीकार नहीं करेंगे।"
इतिहास पर कटाक्ष
भागवत के उस बयान पर सवाल उठाते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़कों के नाम आक्रांताओं पर नहीं होने चाहिए, मौलाना रशीदी ने कहा, "जो मुसलमान यहां आया, उसने देश को आगे बढ़ाया, लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ क्यों नहीं बोलते? जिन्होंने देश को लूटा और सब कुछ अपने साथ ले गए।"
आरएसएस का राजनीतिक दावा खारिज
उन्होंने कहा, "भागवत कहते हैं कि आरएसएस का राजनीति से कोई संबंध नहीं, लेकिन उनके सभी बयान सियासी ही हैं।"
मजबूती से विरोध जारी रहेगा
मौलाना रशीदी ने दोहराया, "कोई भी समुदाय अपने पर्सनल लॉ को खत्म करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं करेगा। हम ऐसे कॉमन सिविल कोड को स्वीकार नहीं करेंगे। मोहन भागवत को समझ लेना चाहिए कि यह देश सबका है और संविधान ही इसकी असली ताकत है।"

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