प्राकृतिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है मधुमेह को: आयुर्वेद
नई दिल्ली। आम धारणा है कि मधुमेह (डायबिटीज) बीमारी केवल मीठा खाने से होती है और इसका इलाज केवल दवाइयों पर निर्भर है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार इसे प्राकृतिक तरीकों से नियंत्रित किया जा सकता है। शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन का निर्माण पैंक्रियाज में होता है, जो ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। जब शरीर इस इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तो ग्लूकोज रक्त में जमा होने लगता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है, वजन घटने लगता है, बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है, पैरों में झुनझुनी, आंखों की कमजोरी और किडनी व दिमाग पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है। आयुर्वेद के अनुसार, मधुमेह को वात, कफ और मेद दोष से जुड़ी बीमारी माना गया है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा को खत्म कर देती है।
इसके प्रमुख कारणों में अत्यधिक वसा और कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन, मानसिक तनाव, नींद की कमी, शारीरिक क्रिया में कमी और मीठे पदार्थों का असंतुलित सेवन शामिल है। आयुर्वेद में मधुमेह को नियंत्रित करने के कई देसी उपाय बताए गए हैं। सुबह खाली पेट भिगोए हुए मेथी दाने का पानी पीना बेहद लाभकारी होता है। ताजे करेले और जामुन की गुठली से बना रस ब्लड शुगर को संतुलित करने में मदद करता है। साबुत धनिया के बीज का पानी और रात में त्रिफला चूर्ण का सेवन भी शुगर लेवल नियंत्रित रखने में सहायक है। इसके अलावा नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इस बीमारी से लड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, हल्का योग या प्राणायाम करना, तथा आहार में हरी सब्जियां, दालें और मौसमी फल शामिल करना बेहद जरूरी है। साथ ही, चाय और कॉफी का सेवन कम करें और रात में हल्दी वाला दूध पीना फायदेमंद साबित हो सकता है।
हालांकि, इन उपायों को अपनाने के साथ दवा लेना बंद नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह से ही दवा की मात्रा घटाई या बदली जानी चाहिए। यदि जीवनशैली में सुधार और आयुर्वेदिक उपचार को अपनाया जाए, तो मधुमेह को नियंत्रित रखना पूरी तरह संभव है और व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है। बता दें कि आधुनिक जीवनशैली और असंतुलित दिनचर्या आज कई बीमारियों की जड़ बन चुकी है। कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का शिकार होना अब आम बात हो गई है। इन्हीं बीमारियों में एक है मधुमेह (डायबिटीज), जो शरीर को धीरे-धीरे अंदर से कमजोर कर देती है।

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