18 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने शुरू किया अनिश्चितकालीन आंदोलन
कचरा गाड़ियों के पहिये थमे; 'रामकी' कंपनी के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 70 वार्डों में सफाई व्यवस्था चरमराने का खतरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहर में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने वाले वाहन चालक और हेल्पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। निजी सफाई कंपनी 'रामकी' के तहत काम करने वाले ये सभी कर्मचारी अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं, जिससे शहर की रंगत बिगड़ सकती है।
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पूरी तरह बंद
आंदोलनकारी कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक प्रबंधन उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। इसके तहत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम पूरी तरह ठप कर दिया गया है। कर्मचारियों के इस कड़े रुख से राजधानी के आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
"नो वर्क, नो पे" की चेतावनी के बाद बढ़ा विवाद
मिली जानकारी के मुताबिक, कर्मचारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच विवाद तब और गहरा गया जब कंपनी ने "काम नहीं तो वेतन नहीं" (No Work, No Pay) के नियम के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दे डाली। इस अल्टीमेटम से नाराज होकर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और मामला हड़ताल तक पहुंच गया।
शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी कंपनी के मुख्य दफ्तर के गेट पर जमा हो गए। उन्होंने वहां तालाबंदी कर दी और गेट के सामने ही धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का साफ संदेश है कि अब बातचीत तभी होगी जब उनकी मांगें पूरी की जाएंगी।
निगम के 70 वार्डों में मंडराया संकट
उल्लेखनीय है कि 'रामकी' कंपनी के जिम्मे रायपुर नगर निगम के लगभग 70 वार्डों से कचरा उठाने का काम है। इतनी बड़ी संख्या में वार्डों के प्रभावित होने से शहर के एक बड़े हिस्से में गंदगी और कचरे के ढेर लगने की आशंका बढ़ गई है।
जनता की बढ़ेगी परेशानी, स्वास्थ्य पर भी खतरा
सफाई व्यवस्था के अचानक इस तरह ठप होने से रायपुर के रिहायशी इलाकों में घरेलू कचरे का उठाव रुक जाएगा। यदि यह गतिरोध कुछ दिन और खिंचा, तो भीषण गर्मी के इस मौसम में रिहायशी इलाकों में सड़न और बदबू फैल सकती है, जिससे संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

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