गेम चेंजर! गिनिया को मिलेंगे बिहार में बने 150 भारतीय रेल इंजन, दुनिया में बढ़ा भारत का दबदबा
बिहार को औद्योगिक रूप से देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है. लेकिन, अब बिहार की यह पहचान बदल रही है. अब बिहार हैवी इंडस्ट्री के मामले में भारत ही नहीं दुनिया के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है. जल्द ही बिहार के मढ़ौरा में बने रेल इंजन अफ्रीका के गिनी की पटरियों पर दौड़ लगा रहे होंगे. मेक इन इंडिया पहल के तहत बिहार स्थित मढ़ौरा डीजल लोकोमोटिव फैक्ट्री में बने 150 इवोल्यूशन सीरीज के ES43ACmi इंजनों का गिनी एक्सपोर्ट किए जाएंगे. वहां ये सिमंडौ आयरन ओर प्रोजेक्ट में काम आएंगे.
कितने दिनों में पूरा होगा निर्यात?
3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का यह ऐतिहासिक सौदा ग्लोबल मार्केट में भारत के रेलवे मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा. रेलवे के अधिकारियों ने PTI की एक रिपोर्ट में बताया कि इस साल 37 इंजनों का निर्यात किया जाएगा, जबकि अगले वित्तीय वर्ष में 82 इंजनों का निर्यात किया जाएगा और तीसरे वर्ष में 31 इंजनों का निर्यात किया जाएगा. रेलवे के अधिकारियों को कहना है कि मढ़ौरा लोकोमोटिव फैक्ट्री भारत को रेल इंजन मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की क्षमता रखती है.
कैसे होंगे ये इंजन?
रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी इंजनों में एसी कैब का बंदोबस्त होगा. प्रत्येक इंजन में एक कैब होगी और दो इंजन मिलकर अधिकतम 100 वैगनों को एक साथ खींच पाएंगे. मढ़ौरा लोकोमोटिव फैक्ट्री में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए इंजनों का निर्माण और परीक्षण किया जा रहा है. इसके लिए परिसर के ब्रॉड गेज, स्टैंडर्ड गेज और केप गेज पटरियां बिछाई गई हैं. ये इंजन अपनी क्लास में सर्वश्रेष्ठ उत्सर्जन मानकों के साथ आते हैं. इसके अलावा इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम दिया गया है.
मिलती हैं ये सुविधाएं
इन इंजनों में रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव और वाटरलेस टॉयलेट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इसके अलावा क्रू के लिए एर्गोनोमिक केबिन बनाया गया है, जहां वे आराम से लंबी दूरी का सफर तय कर सकते हैं. इसे सिंक्रनाइज्ड ऑपरेशन और बेहतर माल ढुलाई के लिए DPWCS लैस बनाया गया है.
कैसे मिला यह सौदा?
यह प्रोजेक्ट ग्लोबल बिडिंग ऑर्डर के जरिये मिला है. इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग एक्सिलेंस का पता चलता है. निर्यात किए जाने वाले इंजन 4500 एचपी, एसी प्रोपल्शन, रीजनरेटिव ब्रेकिंग, माइक्रोप्रोसेसर-बेस्ड कंट्रोल और मॉड्यूलर आर्किटेक्चर से लैस हैं.

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