यूरोप में फैल रहा स्वास्थ्य संकट, एचआईवी और टीबी पर चिंता बढ़ी
स्टॉकहोम। यूरोप में संक्रामक बीमारियों के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। 'यूरोपीय रोग निवारण एवं नियंत्रण केंद्र' (ECDC) ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि इन बीमारियों पर लगाम लगाने के लिए तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो अगले तीन सालों के भीतर पूरे यूरोप में ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) संक्रमण के लगभग 80 हजार नए मामले सामने आ सकते हैं। इसके साथ ही, इसी समयावधि में तपेदिक (टीबी) की वजह से 9 हजार से अधिक लोगों की जान जाने की भी आशंका जताई गई है।
एक दशक में दर्ज की गई यौन संचारित रोगों की सबसे ऊंची दर
ईसीडीसी की निदेशक पामेला रेंडी-वैगनर ने मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यूरोप इस समय एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। उन्होंने बताया कि एचआईवी, टीबी और अन्य यौन संचारित संक्रमणों (STIs) के ग्राफ में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो पूरे महाद्वीप की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में यूरोप में पिछले पूरे एक दशक (10 साल) की तुलना में यौन संचारित संक्रमणों की सबसे ऊंची दर दर्ज की गई है। इस दौरान सिफलिस और गोनोरिया जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में भी अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आम लोगों में जागरूकता की भारी कमी, समय पर बीमारियों की जांच (टेस्टिंग) न होना और सुरक्षित यौन व्यवहार को लेकर बरती जा रही लापरवाही इस खतरनाक उभार के मुख्य कारण हैं।
संक्रामक रोगों से हर साल 59 हजार मौतें
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों के साथ-साथ आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे जैसे देशों में भी इन संक्रामक रोगों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि इन सभी देशों को मिलाकर हर साल लगभग 59 हजार लोग एचआईवी, टीबी और अन्य यौन जनित रोगों से पैदा होने वाली शारीरिक जटिलताओं के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में यूरोपीय संघ, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन और नॉर्वे में तकरीबन 8 लाख लोग एचआईवी संक्रमण के साथ अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि समय पर सटीक जांच, प्रभावी व आधुनिक इलाज और जमीनी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर ही इन डरावने आंकड़ों को बढ़ने से रोका जा सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईसीडीसी (ECDC) ने सभी सहयोगी देशों से अपील की है कि वे अपने यहाँ एचआईवी और टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों को और अधिक मजबूत करें। साथ ही, अस्पतालों में टेस्टिंग सुविधाओं का दायरा बढ़ाएं और समाज के सबसे संवेदनशील व उच्च जोखिम वाले समूहों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करें। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस चेतावनी के बाद भी लापरवाही बरती गई, तो आने वाले सालों में पूरे यूरोप को एक बहुत बड़े मेडिकल इमरजेंसी जैसे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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