वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की राह पर भारत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के लेख पर प्रकाश डाला है, लेख में बताया गया है कि भारत जल्द ही पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने की राह पर है। यह प्रगति सेमीकॉन इंडिया समिट 2025 जैसे आयोजनों में भी दिखाई देगी।
इस लेख में बताया गया हैं कि इन्हें स्टील और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्रों का हिस्सा माना जाता है। ये करीब हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में छिपे होते हैं, और भविष्य में इनकी मांग लगातार बढ़ेगी। भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं। हमारा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सालाना 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके अलावा, एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक वाहन भी सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ा रहे हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत, 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी गई है। इसमें से पहली मेड इन इंडिया चिप इसी साल बाजार में आने की उम्मीद है। साणंद में एक पायलट प्लांट पहले ही शुरू हो चुका है, और अगले एक साल में चार और प्लांट्स उत्पादन शुरू करने वाले है। एप्लाइड मैटेरियल्स, लैम रिसर्च और मर्क जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं, जिससे एक मजबूत इकोसिस्टम बन रहा है।
भारत में वैश्विक चिप डिजाइन वर्कफोर्स का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। एक अनुमान के अनुसार, अगले दशक में सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी होने की आशंका है, जिसे भारत पूरा करने की तैयारी कर रहा है। मोदी सरकार 350 संस्थानों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स मुफ्त में दे रही है, जिसका उपयोग 60,000 से अधिक छात्र और स्टार्टअप कर रहे हैं।
माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज जैसे स्टार्टअप स्वदेशी प्रोसेसर पर आधारित चिप्स बना रहे हैं। नेत्रसेमी जैसे स्टार्टअप ने रिकॉर्ड 107 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल की है, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी के स्पष्ट दृष्टिकोण, कार्यान्वयन पर ध्यान, पेशेवरों के हाथों में निर्णय लेने की प्रक्रिया, वैश्विक सहयोग और राज्य सरकारों का मजबूत समर्थन इस सफलता के मुख्य कारक हैं।

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