अमीर भारतीयों का बदलता पोर्टफोलियो: रियल एस्टेट और प्राइवेट इक्विटी में बढ़ रहा निवेश
भारत के सबसे अमीर लोग अब पारंपरिक निवेश ऑप्शन जैसे शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से हटकर नई और अधिक सेफ परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर भारतीय कम जोखिम वाले रियल एस्टेट में निवेश कर अपनी संपत्ति बढ़ा रहे हैं. जिसका शेयर बाज़ार या स्टार्टअप से कोई लेना-देना नहीं है. रियल एस्टेट 7 से 10 साल में 5 करोड़ रुपए को 12-14 करोड़ रुपए में बदल सकता है.
मुंबई में कारमाइकल रोड से लेकर नई दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में, रियल एस्टेट मार्केट में पिछले तीन साल में 25,000 करोड़ रुपए से अधिक की डील हुई हैं. रियल्टी डेटा एनालिटिक्स फर्म Zapkey.com के आंकड़ों के अनुसार, ये पिछले साल की तुलना में लगभग 90% अधिक है.
अब कहां पैसा लगा रहे हैं देश के सबसे अमीर लोग?
मुंबई, नई दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में प्रमोटरों और पारिवारिक ट्रस्टों द्वारा उच्च वैल्यू वाले खरीद में ये उछाल बदलाव को दिखाता है. ये परिवार उन्हें रणनीतिक, दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखते हैं जो पीढ़ियों तक पैसों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. डेलोइट इंडिया के पार्टनर विवेक गुप्ता ने कहा, ये आइडिया बड़े शहरों में विकसित होने के तरीके के अनुरूप है. अब भारत में इसे तेजी से देखा जा रहा है – बड़े व्यावसायिक ग्रुप ऐसी संपत्तियों को लॉक करना चाहते हैं जो वैल्यूएबल और रेयर हो ताकि वो पीढ़ियों तक विरासत बन सकें.
संपत्ति लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं निवेश का जरिया
वेदांता ग्रुप, बजाज ग्रुप, गोदरेज, इन्फोसिस, राधाकिशन दमानी, उदय कोटक, जीवीके, वेलस्पन, पॉलीकैब, पार्ले प्रोडक्ट्स और डिविस लैबोरेटरीज उन बड़े व्यापारिक ग्रुप और परिवारों में शामिल हैं, जिन्होंने प्रमुख शहरों में बंगले, लक्जरी अपार्टमेंट और जमीन खरीदे हैं.
जादा अमीर फैमली के लिए, हाई कीमत वाली संपत्तियां केवल लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं है बल्कि उनके लिए वो एक निवेश का ऑप्शन है जो पीढ़ियों तक उनके पैसों को संभाल कर रख सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसपर एक परिवार का मानना है कि रियल एस्टेट निवेश के बेहतर अवसर प्रदान करता है. वहीं प्राइम रियल एस्टेट सोने से बेहतर है, और हमें उम्मीद है कि यह हालिया रुझान और मजबूत होता जाएगा.

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