अभी जिंदा है जेफ्री एप्सटीन
वाशिंगटन। यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन की मौत को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में सामने आए नए दस्तावेज़ों, वीडियो फुटेज और अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषक द्वारा लिए जा रहे इंटरव्यूज़ में हुए खुलासों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एप्सटीन की मौत से जुड़ी कहानी पूरी तरह सही है। हालांकि ये सभी दावे और आरोप अभी सार्वजनिक बहस और जांच के दायरे में हैं, न कि किसी अदालत द्वारा स्थापित तथ्य।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक इंटरव्यू में फॉरेंसिक विश्लेषक ने दावा किया है कि अस्पताल से बाहर ले जाए गए जिस शव की तस्वीरें मीडिया में आई थीं, उसके कान और नाक एप्सटीन से मेल नहीं खाते। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया फाइलों में एफबीआई ने स्वीकार किया है कि प्रेस को “गुमराह” करने के लिए एक नकली शव इस्तेमाल किया गया। विश्लेषक के मुताबिक एप्सटीन की ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई अहम विवरण गायब हैं। रिपोर्ट में उन्हें “सामान्य खतना किया हुआ पुरुष” बताया गया, जबकि पीड़िताओं ने उनके शरीर को अलग और विकृत बताया था। एक और बड़ा सवाल यह है कि एप्सटीन की मौत की घोषणा से जुड़ी एफबीआई प्रेस रिलीज़ कथित तौर पर मौत से एक दिन पहले की तारीख की बताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू में यह भी दावा किया गया है कि जिस जेल में एप्सटीन बंद था, वहां के कैमरे उसी समय काम करना बंद कर गए जब वे वापस लाए गए और उनकी मौत के अगले दिन फिर से ठीक हो गए। उन्होंने ऐसे फुटेज भी खोजे हैं, जिनके बारे में काननी विभाग ने पहले दावा किया था कि वे रिकॉर्ड ही नहीं हो रहे थे। नई फाइलों में ऐसे ईमेल्स का जिक्र है जिनमें “पिज़्ज़ा”, “चीज़”, “बीफ जर्की”, “श्रिम्प” और “व्हाइट शार्क” जैसे शब्द अजीब संदर्भों में इस्तेमाल हुए हैं। फॉरेंसिक विश्लेषक का दावा है कि ये शब्द नाबालिग लड़कियों के लिए कोड थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
एक अन्य इंटरव्यू में एप्सटीन की पीड़िता जूलियट ब्रायंट ने आरोप लगाया कि 2002 से 2004 के बीच एप्सटीन के प्रभाव में रहते हुए उन्हें डराया-धमकाया गया था। उन्होंने दावा किया कि एप्सटीन खुद को खुफिया एजेंसियों से जुड़ा बताता था और पूरी तरह बेखौफ था। जूलियट ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ बिना सहमति के मेडिकल प्रक्रियाएं की गईं। विश्लेषक के मुताबिक एप्सटीन के पास कई प्रभावशाली लोगों के “बैकअप” थे, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेल के लिए किया जा सकता था। एक मशहूर फिल्ममेकर के कथन का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने एप्सटीन को “काउंट ड्रैकुला की तरह लोगों को इकट्ठा करने वाला” बताया था। इन सभी इंटरव्यूज़ और फाइलों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि एप्सटीन की मौत के मामले में अभी भी कई सवाल मौजूद हैं। हर नई जानकारी सच्चाई साफ करने के बजाय और संदेह पैदा कर रही है। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इन दावों पर कोई नया निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

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